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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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२ पद्मावत । कीन्हेसि बनखँडै औजड़मूरी । कीन्हेसि तरवरै तार खजूरी ॥ कीन्हेसि सावजँ आरणें रहें । कीन्हेसि पंख उड़ैं जहँ चहैं ॥ कीन्हेसि बरएँ श्वेतँऔश्यामा । कीन्हेसि भूखनींद विशरामाँ ॥ कीन्हेसि पान फूल बहु भोगू । कीन्हेसि बहुऔषधं बहुरोगू ॥ दो० निमिर्ष न लाग करत वह, सबै कीन्ह पल एक । गगनं अंतरिक्षैं राखा, बाजें खंभ बिन टेक ॥ कीन्हेसि अगरकस्तूरी १२ बीनौं । कीन्हेसि भीमसेनँ औचीनीं ॥ कीन्हेसि नागेंजोमुखविषै बसा । कीन्हेसिमंत्र हरे जेहि डसा ॥ कीन्हेसिअमृतँ जिये जो पाई । कीन्हेसिविषं मीचँ जेहिखाई ॥ कीन्हेसि ऊख मीठ रस भरी । कीन्हेसि करू बेल बहु फरी ॥ कीन्हेसि मधुं लावै लै माखी । कीन्हेसि भँवरपंखैं औपाखी ॥ कीन्हेसिलोवाँ अंदर चांटी २५ । कीन्हेसि बहुततरहहिं घनमांटी ॥ कीन्हेसि राक्षसैं भूत परेता । कीन्हेसि भूकसैं देवदयँता ॥ दो० कीन्हेसि सहसैं अठारह, वरणबरैं उपराज । भुक्तिदिहिस पुनि सबनकहँ, सकलैं साजनासाज ॥ कीन्हेसि मानुषै दिहिसिवड़ाई । कीन्हेसि अन्नभुक्तिँ तहँपाई ॥ कीन्हेसि राजा भोजहि राजू । कीन्हेसिहास्तिँ घोरतहँसाजूँ ॥ कीन्हेसि तेहिकहँ बहुत विरासू । कीन्हेसिकोइठाकुरँ कोइदासूँ ॥ ˙ जंगल १ पेड़ २ जंगलीजानवर ३ जंगल ४ रंग ५ सफ़ैद-सियाह ६ आ- राम ७ इलाज ८ पलकमारने में ६ आसमान १० बीचो बीच ११ नाम जानवर- परिन्द १२ मुश्क १३ क़िस्म काफ़ूर १४-१५-१६ सांप १७ ज़हर १८-२० जिसके पीने से मुरदा ज़िन्दा होजाय १६ मौत २१ शहद २२ उड़्नेवाले जानवर २३ लोंबड़ी २४ चींवटी २५ शैतानकी क़िस्म २६-२७-२८ हज़ार २६ तरह तरह की पैदायश ३० सब ३१ आदमी ३२ रोज़ी ३३ हाथी ३४ सामान ३५ आराम ३६ मालिक ३७ ग़ुलाम ३८ ॥