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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत। १६ सोंधौ सबे बैठि ले कांधे। भल कपूर खैरी² बांधे ॥ कतहूँ पण्डित पढ़ें पुराना। धर्मपंथ कर करहिं बखानों ॥ कतहूँ कथा कहै कुछ कोई। कतहूँ नाच कूद भल होई ॥ कतहूँ चरहटौ पंखी लावा। कतहूँ पाखंड नाच नचावा ॥ कतहूँ नाद शब्दैं हो भला। कतहूँ नाटक चेटर्क कला ॥ कतहूँ काहु ठगविद्या लाय। कतहूँ मानुष लीन बोराय ॥ दो० उरपंत चोरदूंते गठछोरा, मिलेरहहिं तेहिपांच। जोबहुभांतिसजगैं भाअगमन, गंठै ताकरपैबांच ॥ पुनि आई सिंहल गढ़पासा। कावरणों १४ जनुलाग अकासा॥ तरहिं१५ करहिंवासुकि१६ कीपीठी। ऊपर इन्द्रलोकपर दीठी१७॥ परखोहैं चहुँदिशि सबबांका। कांपैजांघ जायनहिं झांका॥ अगम असूक देखि डरखाये। परै सुसप्तै पतारहिं जाये ॥ नवँ पँवरी२१ बांकी नवखण्डा। नवो जो चढ़े जायब्रह्मण्डा॥ कंचनकोट२२ जड़े नगशीशा। नखतहिंभरीबीजैं पुनिदीशा॥ लङ्काजाहिऊँचगढ़ ताका। निरखि२५ न जाय दृष्टि२६ मनथाका॥ दो० हियैं नसमायदृष्टि२७ नहिं पहुँचै, जानहिंठाढ़सुमेरै२८। कहँलग कहौं उँचाई, कहँलग बरणों३० फेर ॥ ततगढवाणिजैं३१ चलैजगसूरू। नाहिंत होयवाजि३२ रथचूरू ॥ पँवरी३३ नवों वज्र३४ की साजे। सहसैं सहसैं तहँ बैठे पाजे३७॥ हलवाई १ लड्डू २ राह ३ वयान करना ४ बाज़ार ५ गाना ६ आवाज़ ७ करनाटक ८ जादू ९ मकार १० चुगुल ११ होशियार १२ गांठी १३ तारीफ़ १४ जड़ १५ नामसांप १६ देखना १७-२५ खाई १८ चारौंतरफ़ १६ मुश्किल २० सीढ़ी २१ सोनेका क़िला २२ बिजुली २३ क़िला २४ नज़र २६ दिल २७ निगाह २८नामपहाड़ २९ तारीफ़ ३० सौदागर ३१ घोड़ा ३२ मकान ३३ पत्थर ३४ हज़ार ३५-३६ पियादा ३७॥