भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पुनि जो रामि खोई भा मरा । तब एकान्त भयो मिल तरा॥ तस मर होहु मूँद अब आंखी । लावों तीरें टेकैबैशाखी ॥ दो० बावर अन्ध प्रेमका लुब्धो, सुनत वही भा बाट । निमिषे एक महँ लेगा, पद्मावत जेहि घाट ॥ पद्मावत कहँ दुख तस बीता । जस अशोकबिरखातर सीता॥ कनकलता दुइ नारंग भरी । तेहिकभार उठसकै नहिंखरी॥ तेहिपस्थलंकभुअंगिनि डसा । शिरपर चढ़े हिये परगसा ॥ रहि मरनालि टेक दुख दाधी । आधीं कमल भई शशिशि आधी ॥ नलिने खण्डहुइतसकरहाऊँ । रोमाँवली बिसूख कहाऊँ ॥ रही टूट जिमि कंचने तागू । को प्रिय मिलवै देइँ सुहागू ॥ पान न खावै करै उपासू । फूल सूख तन रही न बासू ॥ दो० गगनधर्ति जल बुड़गये, बूड़त होय निसास । पिय पियचातुकै ज्योंररै, मरै सेवात पियास ॥ लक्ष्मी चंचल नारि परेवा । जेहि संत होय छरै कै सेवा ॥ रतनसेन आवै जेहि बाटाँ । अगमने जायबैठ तेहिघाटा ॥ और भई पद्मावत रूपा । कीन्हेसि छांह जरै जेहि धूपा ॥ लखसोकमल भँवरहोय धावा । श्वास लीन्ह वहबासनपावा॥ निरखत आय लक्ष्मी दीठी । रतनसेन तब दीन्हीं पीठी ॥ जाभल होत लक्ष्मी नारी । तजमहेश कित होत भिखारी ॥ पुनि धन फिर आगे है रोई । पुरुष पीठ कसदीन्ह निखोई ॥

  • बहुत कोशिश किया १ किनारा २ लाठी पकड़ ३ मस्त ४ पल ५ सोने की डाली तथा छाती ६ वालनागिन की तरह ७ छाती ८ कमर पकड़के ६ चाँद १० कमल ११ छाती के बाल १२ सोता १३ आसमान ज़मीन १४ पपीहा १५ सच्चे को छजती १६ राह १७ पहिले १८ देखना १६ देखा २० महादेवजी २१ पद्मावत रूप लक्ष्मी २२ बेदर्द २३ ॥