भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 201, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 201

२०० पद्मावत ।

दो० हौं रानी पद्मावत, रतनसेन तुइँ पीउ । आय समुद्रमहँ छांड़े, अब रोय देत मैं जीउ ॥ मैं हौं सोई भँवर औ भोजूं । लेत फिरौं मालतिकर खोजूँ ॥ मालति नारि भँवर अस पीउ । कहँ वह बासरहै थिरै जीउ ॥ कातुइँ नारि करेसि अस रोई । फूल सोई पै वास न होई ॥ भँवर जो सब फूलनकर फेरा । बासन लेइ मालतिहि हेरौ ॥ जहां पाव मालति कर बासू । वँती जिव दै होवै दासू ॥ कित वह वास पवन पहुँचावे । नवतन होय पेट जिव आवे ॥ हौं वह वास जीव बल देउँ । और फूलकी वास न लेऊँ ॥ दो० भँवर मालतिहि पै चहै, काँटन आवे दीठि । सौंहैं भाल खाये हिये, पै फेरे नहिं पीठ ॥ तब हँस कह राजा वह ठाऊँ । जहां सो मालति चल लै जाऊँ ॥ लै सो आय पद्मावत पासा । पानि पियाई मरत पियासा ॥ पानी पिया कमल जस तपा । निकसामूर्य्यसमुद्रमहँ छिपा ॥ मैं पावा पिय समुद्र के घाटा । राजकुँवर मनदिपै ललाटों ॥ दशने दिपै जस हीरा ज्योती । नयन कचूरै भरेजनु मोती ॥ भुजौ लङ्क उर केहरि जिता । मूरति कान्ह देखि गोपिता ॥ जस नल तपतै दमर्नेहिं पूंछा । तस बिन प्राणपिंडै है लूंछा ॥ दो० जस तुइँ पदकै पदारथ, तैसरतन तुहिं योग । मिला भँवर मालतिकहँ, करहु दोउदिशि भोग ॥ पदक पदारथ खीन जो होती । सुनतहिरतन चढ़ीमुखज्योती ॥ १ राजाभोज १ पत्ता २ क़ायम ३ देखना ४ न्योछावर ५ नयाबदन ६ निगाह ७ सामने काँटा ८ छाती ६ शिर १० दाँत ११ कटोरी १२ बाहु कमर छाती चीताकीसी १३ रानी दमन १४ बदन १५ खाली १६ लाल जवाहर १७ ॥