पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। २०१ जानहु सूर्य्य कीन्ह परकाशू । दिन बहुरा भा कमल बिकाशू ॥ कमल जो बिहँस सूर्य्य सुख दरसा । सूर्य्य कमल दृष्टि सो परसा ॥ लोचननै कमल, श्रीमुखसूरू । भयो अत्यंत दुहूँ रस रूरू ॥ मालति देख भँवरै गा भूली । भँवर देख मालति बनफूली ॥ देखा दरश भये इक पासा । वह बहकी वह बहकी आसा ॥ कंचनदाह दीन्ह जनु जीव । उगा सूर्य्य लूटगा सीवं ॥ दो० पांयपरी धन पीयके, नयनन सों रज मेट । अचरजभयोसबनकहँ, भईशशिकमलहिभेंट ॥ जन काहूकहँ होय विछोऊँ । जस वेमिले मिलैसबकोऊ ॥ पद्मावंत जो पावा पीऊ । जनु मरजियेपरा तन जीऊ ॥ कै न्योछावर तन मन वारे । पांयन परी घाल कै नौरे ॥ नैवैं अवतार दीन्हविधि आजू । रही छौर मानुष भइ साजू ॥ राजा रोय घालँगँरेपागा । पद्मावत के पांयन लागा ॥ तनजियमहँविधि दीन्ह विछोऊ। असनगरीतबचीन्हनकोऊ ॥ सोई मार छौर के मेटा । सोइ जियाय करावे भेटा ॥ दो० महमद मीतजोमनवसै, तेही मिला विधिआन । संपति विपति पुरुषकहँ, काहलाभ का हान ॥ लक्ष्मी सों पद्मावत कहा । तुम प्रसाद पायौं जो चहा ॥ जो सब खोय जाहिं हम दोऊ । जो देखें भल कहैं न कोऊ ॥ जे सब कुँवर आय हम साथी । औजितहस्ति घोरआवाथी ॥ जो पावे सुख जीवन भोगू । नाहित मरनभरन दुखरोगू ॥ रोशनी १ मिलना २ निगाह ३ आंख ४ सूर्य्य ५ दोनों खुशहुये ६ तथा पद्मावत ७ तथा राजा ८ सोना औटाहुया ६ जाड़ा १० चांद ११ जुदाई १२. गरदन १३ नई पैदायश १४ ईश्वर १५-१८ राख १६ गलेमें पगड़ी १७ धूर १६ फ़ायदा २० नुक़सान २१ हाथी २२ ॥