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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 206

पद्मावत । २०५ सब दुख जस केंचुलगा छूटी। होय निसरी जस बीरबहूटी ॥ जस भुइँदहि असाढ़ पलहाई। परहिं बूँद औ सोंध बसाई ॥ वहीभाँति पलही सुखवारी। उठी करलिनइकोंपसँवारी ॥ हुलस गंग जिमि बाढ़े लेई। यौवन लाग हिलोरे देई ॥ काम धनुषशरै दै भइ ठाढ़ी। भाग्यो बिरह रहे जो बाढ़ी ॥ दो० पूँछहिं सखी सहेली, हृदयँ देख आनन्द । आज बदन तुम निरमल, कहाँउवाहैचन्द ॥ अबलगसखीपवनरहि ताताँ। आजलागमोहिंशीतलगाताँ॥ र्महि हुलसी जसपावसँछाँहाँ। तसहुलासेउपजौजियमाहां ॥ दशौ दावकै गा जो दशहरा। पलटा सोई नाव लै महरा ॥ अब यौवन गङ्गा होय बाढ़ा। औटन कठिन मार सबकाढ़ा॥ हरियर सब देखे संसारा। नई चाँर जनुमा अवतारा ॥ भाग्यो बिरह करत जो दाहूँ। भामुख चन्द छूटगा राहू ॥ लहिकहिंनयनहारहिये खिला। को धौं हितू आयके मिला॥ दो० कहतहिं बात सखिनसो, ततखने आवा भाट। राजा आय नेर भा, मंदिर बिछायों पाँट ॥ सुनतहि खन राजां कर नाऊँ। भा हुलास सबठावहिं ठाऊँ ॥ पलटा जनु वरपारृतु राजा। जस असाढ़ आवै देरै साजा॥ देख से छत्र भई जगछाहां। हस्तिं मेघ उनये जगमाहां ॥ सैनं पूर आई घनघोरा। रहस चाव बरषे चहुँओरा ॥ धर्तिस्वैर्ग अब होय मिलावा। भरहिंपुखरऔतालतलावा ॥ उसीतरह १ बागीचा २ कमान-तीर ३ दिल ४-१५ मुंह ५ पाकसाफ़ ६ गर्म हवा ७ ठण्ढाबदन ८ ज़मीन ६ बरसात १० खुशी ११ पैदा होना १२ नईतरह १३ जलाना १४ तुरन्त १६ तख़्त १७ फ़ौज १८-२० हाथी १६ ज़मीन-आसमान २१ ॥