भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 207

२०६ पद्मावत । उठीलहकमँहिसुनितेहिनामा । ठांवहिं ठांव दूब असजामा ॥ दादुर मोर कोकिला बोले । हतजोअलौपेजीभसबखोले ॥ दो० भये असवार पंथमें, मिले चले सब भाय । नदी अठारह खण्डा, मिली समुद्रकहँजाय ॥ बाजत गाजत राजा आवा । नगर चहूँदिश बाजवधावा ॥ बिहँस आय मातासों मिला । रामहि जनु भेंटी कौशिला ॥ साजे मन्दिर बन्दनवारा । औ बहुहोय सो मंगलचारा ॥ पद्मावत कर आव विमानू । नगमतिदहकउठी तसभानू ॥ जनहु छांह महँ धूप देखाई । तैसे झौर लाग जो आई ॥ सही न जाय सौतकी झारा । दूसरे मन्दिर दीन्ह उतारा ॥ भई उहां चौखण्डबखानी । रतनसेन पद्मावत आनी ॥ दो० पुहुप सुगन्ध संसार महँ, रूप बखान न जाय । हेमसेतं उग्रगाजना, जगत पात पहिराय ॥ बैठ सिंहासन लोग जोहारा । निर्धनी निरगुणेँ द्रव्यओहाराँ ॥ अगनितें दान निछावरकीन्हा । मँगतन दान बहुतकै दीन्हा ॥ तैरी हस्ति लै महावतमिला । तुलसी लै उपरोहित चले ॥ बेटा भाय कुँवर जेत आवहिं । राजा हँसहँस गले लगावहिं ॥ नेगी गेजें मिले अरकाना । पंवरथ वाजे घर मंतयानाँ ॥ मिले कुँवर कापर पहिराये । देकर द्रव्य तिनघरहिं पठाये ॥ सबकी दर्शा भई पुनि दुनीं । दानं दांग सबै जग सुनी ॥ ज़मीन १ मेढक २ ग़ायब ३ पहिले ४ चंडोल ५ सूर्य्य ६ आग ७ चारों तरफ़ मशहूर ८ फूल ६ मिस्ल बर्फ़सफ़ेदबहार के मोसिम में हरेहरे पत्ते लहराते हैं १० ग़रीब ११ बेहुनर १२ जमा करना १३ बेहिसाब १४ घोड़ा १५ हाथी १६ हक़दार १७ मस्त १८ शक्ल १६ ख़ैरात और इनआम २० ॥