पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 208, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें[Header] पद्मावत । २०७
दो० बाजै पाँचशब्दै नित, सिद्धै बखानै भाट । छत्तिस गौरी षटदरशन, आय जुरे वह पाटै ॥ सब दिन राजा दान देवावा । भई निश नागमती पहँ आवा ॥ नागमती मुख फेरिकै बैठी । सोनहिंकरहि पुरुष सो दीठी ॥ ग्रीषमँ जरत छोड़ कै जाय । सो मुख कौन देखावे आय ॥ जोह जरै परबत वन लागी । उठी झारि पंखी उड़ भागी ॥ अब शाखा देखी औछांहां । कौने रहस पसारेसि बांहां ॥ कौन्ह्यो थिरक बैठि तेहिदारा । कौन्ह्यो कली केलिकुरबारा ॥ तू योगी होयगा बैरागी । हौं जरिछार भयों तुहि लागी ॥ दो० काह हँसो तुम मोसों, कियो और सो नेह । तुहिं मुख चमकै बीजुली, मुहिं सुख बरषे मेह ॥ नागमती तू पहिल बिवाही । कठिनै सुप्रीति दही जसदाही ॥ बहुते दिनन आव जो पीउ । धनै न मिलै धन पाहन जीउ ॥ पाहन लोह पोढ जग दोऊ । सोउ मिलैं जो होय बिछोहू ॥ भलाहिं सेत गङ्गाजलै दीठा । यमुन जो श्याम नीर अतिमीठा ॥ काह भयो तन दिनदशदहा । औ बरषा शिर ऊपर अहा ॥ कोइ कहि पास आशकै हेरा । धनवहदरश निराश न फेरा ॥ कण्ठ लायके नारि मनाई । जरी जो बेल सींच पलहाई ॥ दो० सहस अठारह शाख फर, दाड़िम दाखें जँभीर । सबै पंख मिल आय जोहारे, लौट वही भइ भीर ॥
[Footnotes] नगारा-शहनाई-करनाल-तुरही-झांझ १ तारीफ़ २ योगी-जंगम-से- वरा-संन्यासी-ब्राह्मण-दरवेश ३ तख़्त ४ मर्द ५ शीत ६ घड़ी गरमी ७ आग ८ किसकली के लिये कुलेल मचाते थे ९ राख १० तख़्त मुहब्बत जली जैसा जलना चाहिये ११ नागमती १२ पत्थर १३ जुदाई १४ सफ़ेद गंगाजल तथा पद्मावत १५ सियाह पानी १६ थोड़े दिन जली १७ उम्मेद १८ ना उम्मेद न करना चाहिये १९ हज़ार २० अनार २१ अंगूर २२ ॥