भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 209

२०८ पद्मावत । जो भा मेरुँ भयो रँग राता । नागमती हँसि पूँछी बाता ॥ कहु जो कन्त परदेश लुभाने । कसधन मिली भोगकसमाने ॥ जो पद्मावत मुठ है लोनी । मोरे रूप कि सरवरै होनी ॥ जहां राधिका अप्सर माहां । चन्द्रावल सरपूर्र्जे न छाहां ॥ भँवर पुरुष असरही न राखा । तजै दाखँ महुवा रस चाखा ॥ तज नागेसरं फूल सुहावा । कमल बसेंधी सो मन लावा ॥ चौ अन्हवाय भरे अरगजाँ । तौहु विसायँध वहिनहिंतजा ॥ दो० काह कहूं हूं तोसों, कुछ नहिं तोरे भाव । यहां वात मुखमोसों, वहां जीव वह ठांव ॥ दुखकि कथाकहिर्र्यनिबिहानी। भयो भोर जहँ पद्मिन रानी॥ भानुँ देखशैशिवदन मलीना । कमलनयनरोती तनखीनों ॥ रयनिनखतगिनकीनहबिहानू । विमलेँ भई देखी जस भानू ॥ सूर्य हँसा शैशि रोय उफारा । टूटआंसु जस नखतहिं माराँ ॥ रही न राखी होय निसासी । तहँवा जाउ जहांनिशिँ वासी ॥ हौं कै नेह कुवां महँ मेलीं । सींचहिलाग मुरानी बेली ॥ भये दुइ नयन रहँट की घरी । भरहिं लै ढारेँ छूछी भरी ॥ दो० शुभ्र सरोवरँ हंसजल, घटातो होयबिछोयेँ । कमल प्रीति नहिं परँहरे, सूख बेल पर होय॥ पद्मावत तुइँ जीव पराना । जियते जगतपियारन आना॥ तुइँजिमकमलबसीहियेँ माहां । हौंहोयअलि वेधातोहिंपाहां ॥ मालति कली भँवर जो पावा । सोतज आनफूल कितभावा॥ : हमबिस्तरों में मस्त १ खूबसूरत २ बराबरी ३-४ मर्द ५ अंगूर ६ चोवा ७ खुशबू ८ रातविताई ६ सूर्य १० चांद ११-१५ लाल १२ पतली कमर १३ रंजज्यादा हुआ सूर्य को देखके १४ माला १६ रात १७ तालाव १८ जुदाई १६ छोड़ना २० दिल २१ भँवर २२ ॥