भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत । २०६ मैं हौं सिंहल की पद्मिनी । सरने पूज जम्बू नागिनी ॥ हौं सुगन्ध निरमलँ उजियारी । वह बिष भरी डेरावन कारी ॥ मोरी वास भँवर सँग लागहिं । वह देखत मानुष डर भागहिं ॥ हौं पुरुपनै की चितवन दीठी ४। जेहिके जियें असआहों पीठि ॥ दो० ऊँची ठांव जो बैठै, करै न नीचे संग । जहां सो नागिन धरगई, काला करै सो अंग ॥ पलही नागमती की बाँरी । सोने फूल फूल फुलवारी ॥ जानवन्त पढ़ि रहि सब दहे । सबै पढ़ बोलत कहकहे ॥ साँरोसुवा महर कोकिला । रहसत आय पपीहा मिला ॥ हारलै शब्द संहोकैं सुहावा । कागकुराहेरै करहिसोआवा ॥ भोगविलास कीन्ह अतिफेरा । बासहिं रहसहिं करहिं बसेरा ॥ नाचहिं पांडुकैं मोर परेवा । निफल न जाय काहुकीसेवा ॥ है उजियार बैठ जस तपै । खूसट मुख न देखावे छिपै ॥ दो० सङ्ग सहेली नागमति, अपनी बारी माहिं । फूल चुनहिं फलतोड़हिं, रहसकूद सुख बाहिं ॥ जाही जूही तेहि फुलवारी । देख रहस रहिसकी न बारी ॥ इते न बातन हिये १३ समानी । पद्मावत सो कही सो आनी ॥ नागमती है अपनी बौरी । भँवर मिला रस करै सँवारी ॥ सखी साथ सब रहसहिंकूदहिं । और शृंगार हार सब गूँदहिं ॥ तुम जोव कावल तुम सो लड़ना । बकचनैंकहोचहो जसकरना ॥ नागमती नागेसर रानी । कमलन आछी अपनी बानी ॥ बराबरी १ पांक साफ़ २ मर्द ३ देखना ४ जिसकी हौं उसके दिलमें बैठी हूं ५ जगह ६ बगीचा ७-१६ चिड़िया ८ जलना ६ तोता मैना १० नाम चिड़िया ११-१२-१४ कौवा की बोली १३ दिल १५ तुमको जो कहना या करना है सो करो १७ ॥