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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 211

२१० पद्मावत । जस सेवंती गुलाल चमेली । तैसि एकजन वहू अकेली ॥ दो० अब सुदरशनें गूजा, तब सतें वरगै योग । मिला भँवर नागेसरसेते, वही देहि सुखभोग ॥ सुनि पद्मावत रिस न सँभारी । सखिनसाथ आई फुलवारी ॥ दोउ सौत मिल पाटें जो बैठी । हियविरोधे मुख बातें मीठी ॥ बारीहँटि सो रँग सो आई । पद्मावत हँस बात चलाई ॥ बारी सुफल अहै तुम रानी । है लाई पै लाय न जानी ॥ नागेसर औ मालति जहां । सुगन्धराव नहिं चाही तहां ॥ रहा जो मधुकर कमल पिरीता । लाग्यो जाय करीलकी रीता ॥ जहँ इमली बांकी हियँ माहाँ । तहँ न भाव नारँगकीछाहाँ ॥ दो० फलहि फूलके फरजहां, देखहु मनहिं विचार । अम्ब लाग जेहि बारी, चम्प लाग तेहिबार ॥ अनतुम कही नीक यह शोभा । पै फलसोई भँवर जेहिलोभा ॥ श्यामै जाम्ब कस्तूरी चोवा । अम्बजोऊँच हृदय तेहिरोवा ॥ तेहिगुन असभइ जाम्बनेवारी । लाई आन मांझ केवारी ॥ जल बाढै वहिया जो आई । है वांकी इमली शिर नाई ॥ तु कस पराई बारी दोखी । तैंजे पानि धावहु मुख सूखी ॥ उठै आग दोउ डार अभैरा । कौन साथ तुहिं वैरी केरा ॥ जों देखी नागेसर बारी । लाग मरी अब सूगाँसारी ॥ दो० जो सरवरै जल बाढ़े, रहै सो अपनी ठाउँ । तथा नागमती वा राजा १ तथा पद्मावत २ तख्त ३ दुश्मनी ४ फुल- वारी खुशरंग देख ५ भँवर कमलका आशिक़ ६ दिल ७-६ कालीजामुन ८ मुश्क ८ जो मैं जवाबदौं तौ पानी छोड़दो और मुँह सूखजाय १० जो मेरे बागको नागेसर देखे ११ तोता मैना १२ तालाब १३ ॥