पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतजें नागेसर को वहि, जाउँ न तुहिं अँबराउँ ॥ तेहि अँबराउँ लीन्हकाजूरी। काहे भई नींब मुख मूरी॥ भई बेर कित कुटिल कटीली। तेंदू कीन्ह चाह बकसीली ॥ नारँगदारिख न तुम्हरी बारी। देखमराहिं जेहि सूगाँसारी ॥ औ न सदाफर तुरँज जँभीरा। कटहर बड़हर लौका खीरा ॥ कमल के हिरदय रोवां केसर। तोहू न सर पूजी नागेसर ॥ जहँकटहरकोउ बरहिं न पूँछी। बड़ पीपर का बोलहि छूछी॥ जो फल देखी सोई फीका। ताकर काह सरौहे नीका ॥ दो० रहु तू अपनी बारी, मोसों जूझ न बारू। मालतिउपमन पूँजी, पुनि करखोजाखाज॥ जो कटहर बड़हर बड़बेरी। तोहिअसनाहिंजोकोकाबेरी ॥ श्यामजानमोर तुरँगजँभीरा। कडुइ नींब तू छाँह गँभीरा ॥ नरियर दारिखें बिही कहँ राखौं। गलगलजाउँसौतैं नहिंभाखों॥ तोरें कहे होय मोर काहा। फरे वृक्ष कोउ ढेल न बाहा ॥ वै सदाफर सो नित फरै। दाँड़िम देख फाटहिर्यै मरै ॥ जाफर लौंग सुपारि छुहारा। मिर्च होय जो सहै न पारा ॥ हौं सुपान रंग पूजन कोई। बिरह जो जरे चून जस होई ॥ दो० लाजहि बूड़ मरेसि नहिं, ऊभे उठावसबाँह । हौं रानी पिय राजा, तो कहँ योगी नाँह ॥ हौं पद्मिनी मानसरे कँवों। भँवर मराले करहिंमोरसेवा ॥
नागेसर छोड़ तेरेबाग न जाऊँ १ बाग २ मुक़ाबिले ३ नींव ऐसी कडुवी ४ बैंगन जंगली से बेर कांटादार अच्छाहोगा ५ अंगूर ६ तोता मैना ७ दिल ८ बराबर ६ कटहर वलंद १० तारीफ़ ११ बराबर १२ अंगूर इसी वास्ते रक्खा है १३ सौतका मुँह से नाम न लों १४अनार १५छाती १६ खाविंद के बिरह में जलके चूना हुई १७ वलन्द १८ खाविन्द १६ नाम तालाव २० कमल २१ हंस २२ ॥