पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२० पद्मावत । शशि सूरहि जोहोतवहज्योती । दिनपहाड़हतरंयनि न होती ॥ तैं हँकारे मोहिं कङ्कनदीन्हा । दृष्टि जोपड़ी जीवहरलीन्हा ॥ नयनभिखार डीठि सतछुंडी । लागे तहां बान हियँ गड़ी ॥ नयनहिं नयन जो बेधसमाने । शीशँधुनहिं निसरेनहिंताने ॥ नवहिं न नाये निलज भिखारी । तबहूँ बुरी लाग मुखगारी ॥ दो० कित करमुखी नयनभै, जीव हरा तेहि बाट। सरवरनीरबिछोह ज्यों, तरकतरक हियफाट ॥ सखिन कहा चेतनबे सँभारा । हिये चेत जिव जाय न मारा ॥ जो कोई पावै आपन मांगा। ना कोइ मरै न काहू खाँगा ॥ वह पद्मावत ऐसी सुरुपा । बरन न जाय काहके रूपा ॥ जें चीन्हीं सो गुप्तै चल गयऊ । परगटगुप्तै जीवविन भयऊ ॥ तुम अस बहुत बिमोहितभये । धुन धुन शीश जीव दै गये ॥ बहुतहिं दीन्ह नाय के ग्रीवों । उतरैं न देइ मारके जीवा ॥ तुइँ पुनि मरत होय जर भुई । अबहिं उघेल कानकी रुई ॥ दो० कोइ मांग मार ना पावै, कोइ बिन मांगा पाव । तूचेतन औरहिसमझावे, बहुतहिंको समझाव ॥ भयो चेत चित चेतन चेता । बहुर न आयसहों दुखएता ॥ रोवत आय परे हम जहां । रोवत चले कौन सुख तहां ॥ जहँवां बहुतसाँसू जिय केरा । कौन रहन पर चलौं सबेरा ॥ अब यहि भीख तहां होय मांगौं। यतनादे जगजन्म न खाँगों॥ औ अस कंकन जोपाऊँ दूजा। दारिद हरै आश मन पूजा ॥ देहली नगर आव तुरकानू । शाह अलाउद्दीं सुलताणू ॥ चाँद १ सूर्य २ बोलाना ३ शोख ४ ईमान छोड़ानेवाले ५ दिल ६ शिर ७ तालाब का पानी घटने से ८ कमी ९-१६ छिपा १० ज़ाहिर वां छिपा ११ आशिक़ १२ गर्दन १३ जबाब १४ अंदेशा १५ ॥