भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 220

पद्मावत । २१६ राघव बिजुली मारा, बेसँभरकुछ न सँभार ॥ पद्मावत हँस दीन्ह झरोखा । अब जो गुनीमरैसुहिं दोखो ॥ सबै सहेली देखी धाई । चेतन चेत जगावैं आई ॥ चेतन परा न आवै चेतू । सबहिं कहा यहि लाग परेत् ॥ कोई कहि कांपै कोईसम्पात् । कोईकहि अहि मिरगी बातू ॥ कोईकहि लागपवनै करझोला। कैसहिं समुझन चेतनबोला ॥ पुनि उठाय बैठारो छाहां । पूँछहिकौन पीर जिय माहां ॥ धौं काहू के दरशन हरा । कै ठग धूतै भूत जेहि हरा ॥ दो० कै तोहि काहू दीन्ह कुछ, कैरे डसातोहि सांप । कहो सो चितहोय चेतन, देह तोर कस कांप ॥ भयो सो चित चेतन जब चेता । नयन झरोखें जीव संकेताँ ॥ पुनि जो बोला मीत बुधिखोवा। नयन झरोखा लायें रोवा ॥ बावर फेर शीश पै धुना । आपन कहि न पराई सुना ॥ जानहु लाई काहुँ ठंगोरी । खने पुकार खन बांधे बोरी ॥ होरे ठगा यहि चितोर माहां । कासों कहों जाउँ केहि पाहां ॥ यहि राजा शठ बड़ हत्यारा । जेँ रखा यहि ठग बटपारो ॥ नाकोइवरजेनै लाग गुहारी । अस यहि नगर होय बटपारी ॥ दो० दृष्टि रहीठगलाडू, अलकें फाँस पर ग्रीवै । जहां भिखारि न बाचै, तहां बचै को जीव ॥ कित धौराहर आय झरोखें। लैगयोजोव दखनाकै धोखें ॥ स्वर्गसूर शशि करै अँजोरी । तेहितेअधिकदेउँ केहिजोरी ॥ पाप १ जूड़ी २ मिरगी को रोग ३ फालिज ४ किसीठग या दगाबाज़ने मन्त्र चलाया ५ खिलादिया ६ कुँभलाया ७ शिर ८ जादू ९ कभी १० छुप ११ राहलूंटनेवाले १२ मनाकरनेवाला १३ निगाह १४ बाल १५ गर्दन १६ महल १७ सूर्य १८ चाँद १६ रोशनी २० बहुत २१ ॥