पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१८ पद्मावत । चह लक्षं बावर कवि सोई। जहँसरस्वती लक्षकित होई॥ कविताँसँगदारिद मतिभंगी। कांटे कुटिल पुहुपँ के संगी ॥ दो० कविता चेला विधिँ गुरु, सीप सेवाती बुन्द । तेहि मानुषकी आशँ का, जो मरजियासमुन्द॥ यहि सो बात पद्मावत सुनी। देश निसारा राघव गुनी॥ ज्ञानदृष्टि धनअगम विचारा। भलनकीन्हअसगुनीनिसारा॥ जे जार्यैनीपूज शशिक़ाढ़ी। सूर्य्यकी ठांवकरें पुनि ठाढ़ी ॥ कबकी जीभ खड्ग हरवानी। इकडिशआगदुसरदिशपानी ॥ जनं अयुक्तै मुख काढै भोरे। यश बहुतै अपयश है थोरे ॥ रानी राघव बेगेँ हँकारा। सूरय गढ़तरि लेहु उतारा ॥ ब्राह्मण जहां दक्षिणा पावा। स्वर्गजाय जो होय बोलावा ॥ दो० आवा राघव चेतन, धौराहरेँ के पास। ऐसि न जानी तेहिहृदयेँ, विजुली बसे अकास॥ पद्मावत जो झरोखे आई। नेहिकलङ्कजसर्शशि देखराई॥ ततखनेँ राघव दीन्हअशीशा। भयो चकोर चन्दमुख दीशा ॥ पहिरेर्शशिँ नखतनकीमारेँ। धरंती स्वर्गे भयो उजियारा ॥ औ पहिरे कर कंकन जोरी। नग जोलागतेहितीसकरोरी ॥ कङ्कन एक काढ़ दै डारी। काढ़त नारटूट गयें हारी ॥ जानहुँ चांद टूटले तारा। छूट्यो स्वर्ग काल कर धारा ॥ जनहुँ टूट बिजुली भुइँ परी। उठा चौंध राघव चित हरी ॥ दो० परा आइ भुइँकङ्कन, जगतभयो उजियार। दौलत १ इक़वाल २ कविदारिद्री होता है ३ फूल ४ ईश्वर ५ उम्मेद ६ अक़िल ७ भारीपूजा ८ चाँद ६ तलवारतेज १० बेमौक़ा ११ जल्द १२ महल १३ दिल १४ बेऐब १५ चाँद १६-१८ तुरन्त १७ माला १६ ज़मीन २० आसमान २१ ॥