पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। २१७ राघव के मुख निकसा आजू। पण्डितन कहा काल्ह बड़राजू॥ राजैं दुहूँ दिशा फिर देखा। पण्डित बावरे कौन सरेखाँ॥ भुजा टेक के पण्डित बोला। छोड़हिं देश बचनँ जो डोला॥ राघव करी जाघनी पूजा। चहै स्वभाव देखावै दूजा॥ तेहिं ऊपर राघव बरै खांचा। दुइज आज तौ पण्डित सांचा॥ दो० राघव पूज जाघनी, दुइज देखायस सांझ। वेद पन्थ जे नहिं चलहिं, ते भूलहिं वन माँझ॥ पण्डित कहौं परानहिं धोखा। कौन अगस्त समुद्र जेहि सोखा॥ सो दिन गयो सांझ भइ दूजी। देखी दुइज घड़ी वह पूजी॥ पण्डितन राजा दीन्ह अशीशा। अब कस ये कंचन औ शीशा॥ जो यह दुइज काल्ह की होती। आज तेज देखत शश ज्योति॥ राघव दृष्टिवन्द कलह खेला। सभों माँझ घेटकें अस मेला॥ यहिकर गुरु चमारिन लोना। सिखा कामरू पाठत टोना॥ दुइज अमावस महँ जो देखावै। दिन इक राहु चांद कहँ लावै॥ दो० अस गुणी नहिं चहि नृपसभा, जेहि टोना कर खोज। यही छन्द ठग विद्या, छला सो राजा भोज॥ राघव बैनँ जो कंचैनै रेखा। कसे बान पीतर अस देखा॥ अज्ञा भई रिसान नरेशू। मारों काहि निसारों देशू॥ झूठ बोल थिरै रहै न राचा। पण्डित सोई वेदमति साँचा॥ वेद वचनैं मुख सांच जो कहा। सो युग युग इस्थिरै थिर रहा॥ खोटे रतन सोई फटकरा। केहि घर रतन जो दारिदै हरा॥ कौन पंडित नादान १ होशियार २ बात ३ भारी पूजा ४ क़सम ५ चाँद ६ दरबार ७ जादू ८ राजदरबार में ऐसा जादूगर न चाहिये ९ बात १० सोना ११ हुक्म १२ राजा १३ इज्ज़त नहीं रहती १४ वेद के मुक़ाबिल १५ क़ायम १६ झूठा जवाहर फिटकरी की तरह १७ दारिद दूर नहीं करता १८॥