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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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२१६ पद्मावत । कमलसेन पद्मावत जोई। जानहु चन्द्र धर्ति महँ आई॥ पण्डित बहु बुधवन्त बुलाये। राशि वर्ग औ गिरहगिनाये॥ कहेन बड़े दोउ राजा होहीं। ऐसे बूत दैसे सब तोहीं॥ नवें खण्डके राजा जाहीं। औ कुछदण्डै होयदलमार्ही॥ खुल भंडार कुछ दान देवावा। दुखी सुखी कर नाम बढ़ावा॥ याचक लोग गुनीजन आये। अरु आनंदके बजे बधाये॥ दो० अतिकुछ पावा ज्योतिपिन, औ दैचले अशीस। पुत्रै कलत्र कुटुम्ब सब, जीवहिं कोटि वरीस॥ राघव चेतन चेतन महा। आय उरकेँ राजा यहँ रहा॥ चितचिन्ता जानै बहु भेउँ। कविव्यास पण्डित संहदेउँ॥ बरैनी आय राज की कथा। पिंगल महँ सब सिंहलमथा॥ जो कवि सुनै शीशँ सो धुना। श्रवणैं नाद वेद कवि सुना॥ दृष्टि सो धर्मपन्थ जेहिसूझा। ज्ञानैं सो परमअर्थ मनबूझा॥ योग जो रहै समाधि समाना। भोग जोगुनीकेर गुनजाना॥ बीरै सुरिस मारै मन कहा। सोइ शृङ्गार कन्त जो चहा॥ दो० वेद भेद जस बरैंचि, चितचिन्ता तस चेत। राजा भोजैं चतुरदश, भा चेतन सो हेत॥ घड़ी अचेतैं होय जो आई। चेतनकी सब चेत भुलाई॥ भादौं एक अमावस सोई। राजैं कहा दुइज कव होई॥ पद्मावत से कमलसेन १ बलमें दशगुना २ आपस में फ़रेब ३ बेटा- औरत-ख़ानदान ४ पास ५ दिलका हाल ६ भेद ७ कविताई में व्यासजी ८ पण्डिताई में सहदेव ६ बयान १० छन्द ११ शिर १२ कान में वेदनाद की तरह सुना १३ निगाह १४ अक़्ल से मुश्किल बात दरियाफ़्त क- रता १५ बहादुर १६ नाम पण्डित १७ चौदह विद्या जाननेवाला राजा भोजकी तरह १८ बुरी १६॥