पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २२३ कांच योग जो कंचन१ पावा। मंगन ताहि सुमेरु२ चढ़ावा ॥ नाउँ भिखार जीभ मुख बांची । अबहिंसँभार बातकहु सांची ॥ कहँ अस नारि जगत उपराहीं। जेहिके सरि सूरज शँशि नाहीं ॥ जो पद्मिनि तुइँ मन्दिर मोरे। सातों द्वीप जहां करै जोरे ॥ सप्तद्वीप महँ चुन चुन आनी। सो मोरे सोरहसै रानी ॥ जो उनमहँ देखेसि इक दासी । देख लोन है लोन बिलासी ॥ दो० चहूँखण्ड हौं चकवै, जस रवि तप आकाश । जो पद्मिनि मोरे मंदिर, अप्सर तौ कैलाश ॥ तुम बड़राज छत्रपति भारी। अन ब्राह्मण हौं अहौं भिखारी ॥ चारहुँ खण्ड भीखका बाजाँ। उदय अस्त तुम्ह ऐसो न राजा ॥ धर्मराज औ संतकुल माहां। झूठ जो कहौं जीभ गहि बाहां ॥ कुछ जौ चार सब कुछ उपराहीं। सो यहि चहूँ दीप महँ नाहीं ॥ पद्मिनि अमृत हंस सदूरू१० । सिंहलद्वीप भलाहिं सो मूरू ॥ सातों द्वीप देख हौं आवा। तब राघव चेतन कहवावा ॥ अजहूँ होय न राखौं धोखा । कहौं सो सब नारिन गुणदोखाँ ॥ दो० यहां हस्तिनी सिंहिनी, औ चित्रिनि बनबास । कहौं पद्मिनी पड़ै शिर, भँवर फिरै चहुँपास ॥ खण्ड तैंतीसवां स्त्री वर्णन ॥ पहिले कहौं हस्तिनी नारी। हस्ती की परकीरति१६ सारी ॥ शिर औ पांव सुझै गँय छोटी। उर की खीनं लङ्क की मोटी ॥ कुम्भस्थल गज अमित अमाहीं। गवनै गयन्द ढाल जनु बाहीं ॥ सोना १ नामबड़ाइ २ बराबरी ३ चाँद ४ हाथ ५ चारौंतरफ़ ६ सारी दुनियांका राजा ७ सूर्य ८ पहुँचा ६ लालशेर १० असिल ११ हुक्म १२ ऐब-हुनर १३ कमल १४ हाथी १५ स्वभाव १६ मोटा १७ गर्दन १८ छाती १६ पतली २० कमर २१ नाम हाथी २२ चाल २३ ॥