पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२४ पद्मावत । दृष्टि¹ न आवै आपन पीउ । पुरुष पराये ऊपर जीउ ॥ भोजन बहुत बहुत रतिचाऊ² । अच्छवाई³ सो थोर समाऊ ॥ मधु⁴ जस मन्द बसाय पसेऊ । औ विश्वासै⁵ धरै जसदेऊ ॥ डर औ लाज न एको हिये । रहे जो राखै अंकुश⁶ दिये ॥ दो० गर्जगत चलै चहूँदिश, लायजगत कहँ चोखँ । कही हस्तिनी नारि ये, सब हस्तिनि के दोखँ ॥ दूसर कहौं सिंहिनी नारी । करै बहुत बल अल्प अहारी ॥ उरे⁸ अतिसुअै खीनैं¹² अतिलङ्कौ¹³ । गर्व्व¹⁴ भरी मन धरै न शङ्का ॥ बहुत रोषै¹⁵ चाही पिय हना । आगे घालन काहूँ गिना ॥ अलंकारै अपनी वह भावा । देख न सकै शृंगार परावा ॥ सिंह की चाल चलै डरा¹⁷ ढीली । रोंवां बहुत जांघ औ फीली ॥ मोट मांस रुच भोजन तासू । औ मुख आव विपाएँध वासू ॥ दृष्टि तराहीं हेरै आगे । जन मथवाह रहे शिर लागे ॥ दो० सेजवां मिलत सो स्वामी, लावे उर नख बान । यहि गुण सबै सिंहके, वह सिंहन सुलतान ॥ तीसर कहूँ चित्रिनी नारी । महाचतुर रस प्रेम पियारी ॥ रूप स्वरूप शृंगार सवाई । अप्सरै¹⁸ जैसी रही अच्छवाँई¹⁹ ॥ रोषै²⁰ न जानै हसता मुखी । जहँ अस नारिकन्तै²¹ सो सुखी ॥ अपने पुरुषकी जानै पूजा । एक पुरुष कें जान न दूजा ॥ चन्द्रबदने²² रंगकुमुँदिनी²³ गोरी । चाल सुहाय हंस की जोरी ॥ खीर²⁴ खांड़ कुछ अल्पअहारूँ । पान फूल से बहुत पियारूँ ॥ निगाह १ चाह २ सफ़ाई ३ शहद ४ ख्याल ५ हाथी ६ पियार ७ पेव = थोड़ा ६ खुराक १० छाती ११ चौड़ी १२ वारीक १३ कमर १४ गरूर १५ गुस्सा १६ सूरत १७ नज़र १८ इन्द्रलोककी परी १६ सफ़ाई २० गुस्सा २१ खाविन्द २२ मुँह २३ कोकांयेली २४ दूध २५ थोरी खुराक २६ ॥