भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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२२६ पद्मावत। सोरहशृंगार वरन के, करहि देवता लाल ॥ यहिपद्मिनिचितोर जो आनी। कुंदन कार्या द्वादश बानी॥ कुन्दनकनकें ताहिनहिं वासा। बहुसुगन्धजसकमलविकासाँ॥ कुन्दन कनकेंकठोर सोअङ्गा। वह कोमलरँग पुहुपं सुरङ्गा॥ वह लुइ पवन बृक्ष जेहिलागा। सोइमलयगिरि भयोसभाग॥ काह न मूठ भरी वह देही। अस मूरति केहि दई उरेही॥ सबै पठेतरं चित्र के हारीं। वहक रूपकोइलखी न पारीं॥ कया कपूर हाड़ सब मोती। तेहितेअधिकं दीन्हविधिज्योती॥ दो० सूर्य किरण जस निरमलें, तेहिते अधिक शरीर। सौंहेदृष्टि नहिं जाय कर, नयनहिं आवै नीरें॥ शॅशिमुखजबहिंकहैकछुवाता। उठततन्त सूरज जस रताँ॥ दर्शनैदशनसोकिरणीफूटहिं। सबजगजानिफुलझरी छूटहिं॥ जानहुँशॅशिमहँ वीजेंदेखावा। चौंधपख्यो कुछ कहै न आवा॥ कौंधत रहि जस भादों रैनी। श्यामरैनिजतुचलैउड़ेनी॥ जनु बसन्तऋतु कोकिलबोली। सरस सुनाय सारसरै डोली॥ जनु अमृतहै बचन विकासाँ। कमल जोवास वासधनवासा॥ यहि सर शीश जो नाग बेहेरा। जाय शंख वेनी है परा॥ दो० सबै मनोहरै जायमर, जो देखै तस चोरैँ। पहिले सो दुख बरन के, वरनो वहकशृंगार॥ कितहों रहा कालकर काढ़ा। जाय धौरहेरै तर भा ठाढ़ा॥ कित वह आय झरोखेझांकी। नयनकुरंगिनि चितवनबांकी॥ वदन १ खालिस २ सोना ३-५ खिलना ४-५२ फूल ६ चन्दन ७ बनाना ८ दूती ९ बहुत १० पाकसाफ़ ११ निगाह सामने १२ पानी १३ चाँद १४-१७ लाल १५ दांत १६ बिजुली १८ रात १६ जुगुन् २० तीर २१ उम्मेद २३ चाल २४ महल २५ हिरनी २६ ॥