पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २२७ बिहँसी शशि तरईं जनुपरीं। कैसो रयनि छूटे फुलझरी ॥ चमक वीजै जस भादौं रैनी। जगत दृष्टि भरही उड़ेनी ॥ काम कटाक्ष दृष्टि विष बसा। नागिन अलकँ पलकमहँ डसा ॥ भौंह धनुष परंत काजल बूड़ी। वह भइ बानुकें हौं भइ ऊँड़ी ॥ मार चली मारतहूँ हँसा। पाछे नाग रहा हौं डसा ॥ दो० काल घाल पीछे रखा, गरुड़ न मन्तर कोय। मोर पीठ वह बैठा, कासों पुकारों रोय ॥ बेनी १२ छोर झोर जो केशा। रैनि होय जगदीपकँ लेशा ॥ शिरहत विषहरैं परी झुइँ बारा। सगरे देश भयो अँधियारा ॥ सकपकाहिं विष भरे पसारे। लहरहिं भर लहकहिं अतिकारे ॥ जानहुँ लोटहिं चढ़े भुअङ्गाँ। वेधी बास मलयगिरि अङ्गा ॥ लरहिं मुरहिं जनु मानहिं केली। नाग चढ़े मालति कै बेली ॥ लहरैं देइ जानहु कालिन्दी। फिर फिर भँवर भये चित बन्दी ॥ चँवर धरत आळी चहुँपासा। भँवर न उड़हिं जो लुब्धे बासा ॥ दो० होय अँधेर घने विवि चमके, जयहिं चीर गहि झांप। केशौ नाग कित देख मैं, सँवरि सँवरि जिय कांप ॥ मांग कनकें जो सेंदुर रेखा। जन बसन्त रातौं जग देखा ॥ गइ पत्रावलि पाटी पारी। और चि चित्रविचित्र सँवारी ॥ भई उरेह पण्डुरैं सब नामा। जनु बकें बिखर रहे घनश्यामां ॥ यमुना मांझ सरस्वती मांगा। दुहुँदिश दिये तरंगने गांगा ॥ चांद १ छोटे नखत २ बिजुली ३-२२ निगाह ४-७ जुगनू ५ तिरछी चितवन ६ बाल ८-२३ पलक ६ तीरअन्दाज़ १० निशाना ११ चोटी १२ रात १३ चिराग़ रोशन १४ सांप १५-१६ चन्दन १७ यमुना १८ दिल फँसाना १६ लपटना २० बादल २१ सोना २४ लाल २५ नाम दाया २६ बहुत अच्छी २७ फूल २८ बगुला २६ बादल सियाह ३० लहर ३१ ॥