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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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२२८ पद्मावत । सेंदुर रेख सो ऊपर राती । बीरबहूंटिन की जस पांती ॥ बेलि देवता भये देख सेंदूरू । पूजी मांग भोर उठ सूरू ॥ भोर सांझ रबि होय जो राताँ । वही देख राताँ भा गाताँ ॥ दो० बेनीकारी पुहुप ते, निकसी यमुना आय । पूजइन्द्र आनन्द सों, सेंदुर शीश चढ़ाय ॥ दुइज ललाट अधिकै मनकरा । शङ्कर देख माथ भुइँ धरा ॥ यहि नित दुइज जगत महँ दीशा । जगत जोहारे देइ अशीशा ॥ शशि जो होयन हिंस रवैर छाजै । होय सो अमावस छिप मन लाजै ॥ तिलक सँवारि जो चन्दन रचे । दुइज माँझ जानहुँ कच वेंचे ॥ शशि पर करवट सारा राहू । नखतहिं अस दीन्ह परदाहू ॥ पारस ज्योति ललाटहिं ओती । दृष्टि जो करै होय तेहि ज्योती ॥ श्री १६ जो रतन मांग बैठारा । जानहु गगन टूट निश तारा ॥ दो० शशि और सूर जो निरमलै, तेहिकी ललाट की रूप । निशि दिन चलहिं न सरवैर पावैं, तपत पहो हि अलूप ॥ भौंहें धनुष श्याम जनु चढ़ा । पनचैं करे मानुष कहँ गढ़ा ॥ चन्द कि मूठ धनुष वहताना । जाकर बीजैं बरनि बियवाना ॥ जासों हेर जाय सो मारी । गिरिवर टरहिं सो भौंहहिं टारी ॥ सेतुबन्ध जे धनुष बिडारा । वहू धनुष भौंहहिं सो हारा ॥ हारा धनुष जो बेधा राहू । और धनुष कोइ गिने न काहू ॥ कित सो धनुष भौंह मैं देखा । लाग बान तित आव न लेखा ॥ लाल १-५-६ कुरबान २ सूर्य ३-४-२२ वदन ७ फूल ८ शिर ६ माथा १० ज्यादा ११ चांद १२-१५-२१ बराबर १३-२५ नामनखत १४ रोशनी १६ पेशानी १७ निगाह १८ टीका १६ आसमान २० साफ़ २३ रात २४ गायब २६ निशाना २७ बिजुली २८ पलक के बाल २६ अर्जुन की कमान ३० ॥

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