पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतितबानहिं झांझरभा हियां। जो असमार सो कैसें जिया ॥ दो० सोत सोत तन बेधा, रोम रोम सब देह। नसनसमहँझइसोलँहि, हाड़हाड़भये बेहें ॥ नयन चित्र वै रूप चितेरे। कमलपत्रपर मधुकैर फेरे ॥ समुद्रतरंग उलटहिं जनराँती । डोलहिं औ घूमहिं मदमाती ॥ शरदचन्द महँ खञ्जन जोरी। फिरफिरलरहिं अघोर बहोरी॥ चपलं बिलोल डोल वहलागी। थिर्र न रहहिं चंचल बैरागी॥ निरखें अघाहिं न हत्या हंते। फिरफिर श्रवणहिं लागेमेंते ॥ अंगश्वेते मुखश्यामसो ओहीं। तिरछचलहिंखनसूधनहोहीं॥ सुरै नर गन्ध्रब लार्कै फेराहीं। उलटेचलहिंस्वर्गकहँजाहीं ॥ दो० अस वै नयन चक्र दुइ, भँवर समुद्र उलथाहिं । जनु जिव घालहिं डोले, लै आवंहिं लै जाहिं ॥ नासिकँखड्गे हरी धनकीरूँ। योगशृंगार जिता औ बीरू ॥ शशिमुखसोंहै खड्गगहिरामा । रावण सों चाहै संग्रामा ॥ दुहुँ समुद्र महँ जनु रुचि बीरूँ। सेतबन्धै बांधा नलनीलूँ ॥ तिलकफूल असनासिक तासू । औसुगन्धदीन्हींविधि बासू ॥ करनफूल फेरैं उजियारा। जनहुशरदशशि सोहिलबारा॥ सोहिल चाहें फूल वह ऊँचा। धावहिं नखत न जाई पहुँचा ॥ नजनो कैसो फूल वह गढ़ा। विकसैं फूलसबचाहहिंचढ़ा ॥ दो० असवहफूलबासका आगर, भानासकी समुन्द । 'दिल १ सूराख २-३-४ भँवरा ५ लहर ६ लाल ७ पूर्णमासी का चांद ८ ममोला ६ चंचल १० क़ायम ११ देखना १२ कानसे सलाह १३ सफ़ेद १४ देवता १५ आरज़ १६ आसमान १७ नाक १८ तलवार १६ तोता २० सामने २१ पेड़ २२ पुल २३ नामचन्दर २४ ईश्वर २५ ज्यादा २६ खिलना २७ नाक २८ ॥