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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत । २३५ एक हंस है पंख अमोला। मोती चुनै पदारथे बोला ॥ दूसर नग जो अमृत बसा। सब बिष हरै जहांलग डसा ॥ तीसर पाहनपरस बखाना। लोहछुये होय कञ्चन बाना ॥ चौथ अहै सांदूर अहेरी। जेहि बन हस्ति धरै सब घेरी ॥ पांचों है सो तहां लागना। राजपंख पंखी गरजना ॥ हरनिरोझ कोइ बाचन भागा। जैस शचान तैस उड़भागा ॥ दो० नग अमोल अस पांचों, मान समुद्र वह दीन्ह । इसकन्दर नहिं पाई, जोरे समुद्र धस लीन्ह ॥ पान दीन्ह राघव पहिरावा। दश गजमत्त घोर सो पावा॥ अरु दूसरि कङ्कन की जोरी। रतनजोलागवह तीसकरोरी॥ लाख दिनारे देवाई जेवों। दारिद हरा समुद्रकी सेवों ॥ हों जेहि दिवसै पद्मिनी पाऊँ । तोहि राघव चित्तौर बैठाऊँ ॥ पहिले कर पांचों नग मूठी। सोनगलेउँजोकनकें अँगूठी ॥ सुरजा वीर पुरुप बरयारू। नाजनै नाग सिंह असवारू॥ दीन्हपत्रिलिख बेगैं चलावा। चित्तौरगढ़ राजापहँ आवा ॥ दो० राजैं पत्रि बँचावा, किरपा लिखी अनेक । सिंहलकी जो पद्मिनी, पठैदेव तेहि बेग ॥ खण्डचौंतीसवां लड़ाई राजा और बादशाह ॥ सुन अस लिखा उठाजर राजा। जौं नौदैवतड़प घनै गाजौं ॥ का मोहिं सिंह देखावस आई। कहौं तो शार्दूलै धरखाई ॥


पाद-टिप्पणी (Footnotes): लाल १ पारसपत्थर २ सोना-३ शेरसुर्ख ४-२३ हाथी ५ सीमुर्ग ६ नाम जानवर ७ शिकरा ८ खिलअत ६ हाथीमस्त १० अशरफ़ी ११ दक्षिणा १२ ख़िदमत १३ दिन १४ राजपर बैठाऊँ १५ सोना १६ ज़बरदस्त १७ कोड़ा १८ जल्द १६ मेहरबानी २० बादल २१ बिजली २२ ॥