पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३६ पदमावत । भलहिंजोशाहभूमिपति भारी । मांग न कोऊपुरुपकी नारी ॥ जो सो चक्रवे ताकहँ राजू । मन्दिरै एकअपनकहँ सांजू ॥ अपसरैं जहां इन्द्र पै आवै । और जो सुनै न देखै पावै ॥ कंसका राजजिता जो गोपी । कान्हेन दीन्ह काहुँकहँगोपी ॥ को म्वहिंते अस शूर अगारा । चढ़ै स्वर्ग घुसपरै पतारा ॥ दो० का तोहिं जीव मराऊं, सकत आनका दोष । जोतसईभैनसमुद्रजल, सोझुझाय कितओस ॥ राजा अस न होहु रिसरातौं । सुनहुन जूड़ नजरकहुबाता ॥ मैं हों यहां मरे कहँ आवा । बादशाह अस जानपठावा ॥ जोतोहिभारनऔरहिलीन्हा। पुनिसोकाले उतरैबहिदीन्हा॥ बादशाह कहँ ऐस न बोलू । चढ़े तौ परै जगत महँ डोलू ॥ सूरैहि चढ़त लांग नहिं वारा । दहक आग तेहि स्वर्गपतारा ॥ परबत उड़हिं सूरैके फूकें । यहिगढ क्षारैहोइ यक झोंकें ॥ धसै सुमेरुँ समुद्र गा पाटा । भूमी डोल शेष फण फाटा ॥ दो० तासों कौन लड़ाई, बैठ न चितौर खास । ऊपर लेहु चंदेरी, का पश्मिन इक दास ॥ जो पै धेरनि जाय घरकेरी । का चितौर का राज चंदेरी ॥ जेईलेई घर कारने कोई । सो घरदेई जो योगी होई ॥ रनथंभोरैं हों नाथ हमीरूँ । कल्पै माथ जे दीन्ह शरीरूँ ॥ होंसो रतनसेन शकबँधी । राहुँ वेध जीते सरवन्धी ॥ ज़मीन का मालिक १ तमाम दुनिया का राजा २ क़िला ३ परी ४ श्रीकृष्णचन्द्र५शूरमा ६ आसमान ७ पाप८ प्यासबुझे६ लाल १० दुश्मन११ अंचाव १२ सूर्य १३ नामराजा १४ धूर १५ नामपहाड़ १६ ज़मीन १७ कौ- रंत १८ जो कोई किसी की औरत लैले १६ नामक़िला २० नामराजा २१ शिरकटाना २२ बदन २३ मशहूर २४ निशानाजीत द्रौपदी व्याही २५ ॥