पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३८ पद्मावत । जो चढ़ै आनीजाय जिताई । तब का भै सो जीत जिताई ॥ दो० महूँ समुझ यहि आगमनै, सजराखा गढ़साज । काल्ह होय जेहि आवन, सोचल आवै आज ॥ शुरजाँ पलट शाहपहँ आवा । देव न मानै बहुत मनावा ॥ आग जु जरै आग पै सूखा । जरत रहे न बुझाये बूझा ॥ ऐसे माथ न नावै देवा । चढ़ै सुलेमाँ मानै सेवा ॥ सुनके अस रातौ सुलतानू । जैसे तपै जेठ कर भानू ॥ सहसँ किरनरोष तस भरा । जेहि दिशि देखै तेहि दिशि जरा ॥ हिन्दू देव काह बरै खाँचा । सरकै न आप आगसों बांचा ॥ यहिजैँग आगजुभरमहिंलीन्हा । सोसँग आग दुहूँ जग कीन्हा ॥ दो० रनथँभोरै जसजरबुझा, चितौर परै सो आग । फेर बुझाये ना बुझै, जरै दिवसै के लाग ॥ लिखी पत्रि चारहुँदिशिधाये । जहाँ तहँ उमरा बेगेँ बुलाये ॥ द्वन्द्वै घाव भा इन्द्र सकाना । डोला मेरु शेष अकुलाना ॥ धर्ती डोल कूँर्म खरभरा । महनामर्थे समुद्र महँ परा ॥ शाह बजाय चढ़ाजगजाना । तीसकोसभा पहिल पयानाँ ॥ चितौर सौहँ बारगह तानी । जहँलगसुना कूचसुलतानी ॥ उठसरवानै गगनै लहि छाई । जानहु राँते मेघ दिखाई ॥ जो जहाँ तहँ सोता असजागा । आयजुहार कटकै सब लागा ॥ दो० हस्ति घोर औ दैरैं पुरुष, जहँ तक बेसरौँ ऊँट । जब बादशाह आयेंगे १ पहिले २ नामपहलवान ३ नामबादशाह ४ लाल ५ सूर्य ६ हज़ार ७ गुस्सा ८ घमण्ड ९ भागना १० दुनियामें आगसे जलाया जायगा ११ नाम क़िला १२ दिन १३ जल्द १४ नामबाजा १५ नामपहाड़ १६ नामराजासाँप १७ कछुवा १८ उलटपलट १६ कूच २० सामने २१ खीमा २२ आसमान २३ लाल २४ फ़ौज २५-२७ हाथी २६ खच्चर २८ ॥