पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 240, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २३६ जहँ तहँ लीन्ह पलाने, कटकेँ¹ सुरहें² अस छूट ॥ चले सहसबेसक³ सुलतानी । तीपैंतुरंग⁴ बांक कनकानी ॥ पंखेरी चली जो पाँतिहिंपाँती । वरण वरण औ भाँतिहिंभाँती ॥ काँले कुँमेते नील संपेती । खिंगंकुरंगे बीजें²³ दोरें²⁴ कतीती²⁵ ॥ अवलकेँ¹⁶ अबरसे¹⁷ लँखीशिरौंजी । चौधैर चाचसमुँदसबताजी ॥ किरमर्जे²⁰ नुकरों²¹ जरदौ भले । रूपकगनै बोलसरै चले ॥ पँचकल्याने²² संजावै बखानी । महि²६ सायरसबंचुन²⁷आनी ॥ मुशँकी औहिरमँजी²⁹ इराँकी³० । तुरँकी³¹ कहीसुथौरे बुलौँकी ॥ दो० शिर औ पूँछ उठाये, चहुँदिशि श्वास उनाहिं । रोषे³³ भरे जस बावरे, पवन की बाँसेँ उड़ाहिं ॥ लोहे साँरे³५ हस्ति पहिराये । मेघश्याम³६ जनु गरजतआये ॥ मेघहि चाह अधिकै वैकारे । भयो अमूझ देख अँधियारे ॥ जस भादौ निशि³८ आवैदीठी । स्वँग जाय हरके तेहिपीठी ॥ सोरह लख हँस्ती जब चाला । परवत सरस चलै जग हाला ॥ चले गैंड़ माते मद आवहिं । भागहिंहस्ति⁴² गन्धजोपावहिं ॥ ऊपरजाय गगनै शिर घिसा । औ धर्ती तरिकहँ धस मंसा ॥ भा भूचाल चलत गजगानी । जहँ पग धरहिं उठै तहँ पानी ॥ दो० चलत हस्ति जगकाँपा, चाँपा शेष पतार । कूँर्म जे धर्ती ले रहा, बैठ भयो गजभार ॥ चले सो उमर अमीर बखाने । का बरणों जस उनके बाने ॥ फ़ौज १ टीड़ी २ हज़ार कुरसी ३. तेज़ घोड़ा ४ निशान ५ घोड़ों की ज़ात ६ सें २५ तक सब दुनिया २६ घोड़े की ज़ात २७ से ३२ तक गुस्सा ३३ डर ३४ भूल लोहे की ३५ हाथी ३६-४१-४२ कालें बादल ३७ बहुत ३८ रात ३६ आसमान ४०-४३ कछुवा जिसके ऊपर ज़मीन है ४४ ॥