पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। २३ दो० छत्र गगन १ लगताकर, सूर्यदिपै २ तस आप। सभा कमल जनु विगसी ३, माथे बड़ परताप ॥ साजा राजमंदिर कैलाश । सोनेका सब भूमि अकाशू ॥ सातखंड धवराहर ४ साजा। वही सँवारसकै अस राजा ॥ हीरा ईंट कपूर गिलावा । औनगलायस्वर्ग लयलावा ॥ जानवन्त सबै उरेहै उरेहे । भाँतिभांति नगलागउबेहे ॥ झाकटाव सब आनहु भाँती । चित्रं ८ कटावसो पांतिहिपांती ॥ लागखंभमँणि माणिकजड़े । निशि ११ दिनरहै दीपजनु बरे ॥ देखि धौरहेरै कर उजियारा । छिपगये चांद सूर्य औ तारा ॥ दो० साजीसाज बैकुण्ठजस, तससाजी खंडसात । चौहरैं चौहर भाव तस, खंडखंड ऊपर जात ॥ वरणौं राजमंदिर रनिवासू । अप्सरैंहिं भरा जान कैलासू ॥ सोरह सहसँ १६ पद्मिनी रानी । एक एकते रूप बखानी ॥ अतिस्वरूप औ अतिसुकुमारी । पान फूलकी रहहिं अधौरी ॥ तेहि ऊपर चम्पावति रानी । महा स्वरूप पाट परधौंनी ॥ पीठं बैठिरहि किये शृंगारू । सब रानी वहँ करहिं जुहारू ॥ नितै नवरंग अङ्गमा सोई । प्रथमवैयसँ न शिर पर कोई ॥ सिंहलद्वीप महँ जेती रानी । तिनमहँकनकँ सुबारहबानी ॥ दो० कुँवर बतीसो लक्षणी, अससबमांह अनूपै। जानुवन्त सिंहल द्विपी, सबै बखानी रूप ॥
पाद-टिप्पणी (शब्दार्थ): १ आसमान १-६ चमकना २ खिलना ३ ज़मीन ४ महल ५ मुसव्वरी ७ तरह बतरह ८-६ तसवीर १० जवाहिरात ११ रात १२ मकान १३ अलग १४ बयान करना १५ स्वर्गकी औरत १६ हज़ार १७ सहारा वा खुराक १८ महारानी १६ तख़्त २० हमेशा २१ पहिलीउमर २२ सोना ख़ालिस २३ बेमिसाल २४ बयान करना २५ ॥