पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२ पद्मावत । गिरि ¹पहाड़परवतकहिपेलहिं। वृक्षउचारिभारि मुखमेलहिं ॥ मत्त² मतँगसबगरजहिंवांधे । निशि³ दिनरहहिंमहावतकांधे ॥ दो० धरती⁴ भार अँगोही, पांव धरत उठ हाल। कच्छप : कुर्महि टूटिभुइँफाटी, तेहि हस्तिहि की चाल ॥ पुनि बांधे उजियार तुरंगौँ । कावरणों जस उनके रंगा ॥ लेलं समन्दै चालजगजाने। हांसलँ वोरैं क्याहिवखौने ॥ परी¹⁴ कुरंगैं मेंहो बहुभांती। करेंर कोकलाँ ह चलाहँसुपांती ॥ तीखं तुखारे चांद औ बांके। तड़पहिंतवहिंवाँजि विनहांके ॥ मनते अगमनै डोलहिंवागा । देतउसास गगनै शिरलागा ॥ पावहिं सांससमुदपर धावहिं। वूड़ि न पांव पार है आवहिं ॥ थिरनरहैं रिस लोह चबाहीं। भाजहिंपूँछ शीश उपरौहीं ॥ दो० अस तुखारे सब देखे, जनु मनके रथवाँहि। नयन पलक पहुँचावहीं, जहँ पहुँचाकोइचाहि ॥ राजसभा सब देखे बैठे । इन्द्रसभा जनुपरगइ डीठे²६॥ धनि राजा अससभा सँवारी । जानहुँ फूलिरही फुलवारी ॥ मुकुटबन्द सब बैठे राजा । दैर निशानसबजेहिकेसाजा ॥ रूपवन्तै मनदिपै लिलाटैं। माथे छात्र बैठि सब राजा ॥ जानो कमल सरोवरै फूले । सभाकि रूप देखि मन भूले ॥ पान कपूर मेदैं कस्तूरी³५ । सुगन्धवास भरिरही अपूरी ॥ मांझैं ऊँच इन्द्रासन साजा । गन्ध्रवसेन बैठि तहँ राजा ॥ . पहाड़ १ मस्त २ रात्रि ३ ज़मीन ४ कछुवा ५ हाथी ६ घोड़ा ७ तारीफ ८ नामज्ञात वा रंग घोड़ों के ६-१०-११-१२ वयान करना १३ नाम ज्ञात व रंग घोड़ों के १४-१५-१६-१७-१८-१६ शोरू २० घोड़ा २१-२२-२६ पहिले २३ आसमान २४ शिर उठाये हुये २५ गाड़ीवान २७ आँख २८ निगाह २६ फ़ौज ३० खूबसूरत ३१ माथा ३२ तालाव ३३ केसर ३४ मुश्क ३५ बीचों बीच ३६ ॥