पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। २१ मूले^१ पतार स्वर्ग^२ वहशाखा। अमरबेलिको पावको चाखा॥ चन्द्रपातै^३ औ फूल तरोंईं। होयउजियार नगर जहँताईं॥ वैफल पावै तप करि कोई। बृद्धखाय नवयौवनै^४ होई॥ दो० राजा भये भिखारी सुनि वह अमृत भोग। जेपावा सो अमर भा, न कुछ व्याधि नहिं रोग॥ गढ़ै^६ पर बसहिं चारै^७ गढ़पती^८। अश्वपँगजंपमुवपं^९ नरंपैती^१०॥ सबकधौरहरे^११ सोने साजा। औ अपने अपने घर राजा॥ रूपवन्ते^१२ धनवन्ते^१३ सभोगी। परसैंपषाणपवँरै^१५ तेहिलागी॥ भोग परसैं सदा सबमाना। दुख चिन्ता कोई नहिं जाना॥ मँदिर मँदिर सबके चौपारी। बैठि कुँवर सबखेलहिं सोरी॥ पांसा ढरहिं खेल भल होई। स्वर्ग वान सरपूंजनं कोई॥ भाटबरन केहिं कीरति^२२ भली। पावहिं हस्तिं^२३ घोड़ सिंहली॥ दो० मँदिर मँदिर सबकी फुलवारी, चोवा चन्दन बास। निशि^२४ दिनरहै वसन्तवहँ, छहऋतुबारहमास॥ पुनि चलि देखा राजदुवारा। मानुषफिरहिं पायनहिंबारों॥ हस्तिं सिंहली बांधे बारैं^२४। जनुसजीव^२५ सबठाढ़ पहारा॥ कवन्योश्वेतै^२८ पीतैं रतनौरे। कवन्योहरे धूमैं असकारे॥ बरनेंबरन गगनैं^३३ जसमेघा। उठहिं गगनैं^३५ बैठिजनुठेघाँ॥ सिंहल के बरने^३७ सिंहले। इकइक चाहसो इकइकबले॥ जड़ १ आसमान २ पत्ता ३ नखत ४ नवजवान ५ हमेशा ६ क़िला ७ घोड़ेका सवार ८ हाथीका सवार ९ ज़मीनका मालिक १० राजा ११ महल १२ खूबसूरत १३ दौलतमन्द १४ नसीबवर १५ पारस पत्थर १६ दरवाज़ा १७-२७ हँसीखुशी १८ चौसर १९ बराबरी २० तारीफ़ २१ नेकनामी २२ हाथी २३-२६ रात्रि २४ दखल २५ जानदार २८ सफ़ेद २९ ज़र्द ३० लाल ३१ धुंवां ३२ रंगबैरंग ३३ आसमान ३४-३५ पहाड़ ३६ बयान करना ३७॥