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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत। २४१

ग्वालियर गढ़१ महँ परी मथानी। औ कन्धार२ मथा होय पानी॥ कालिंजर३ महँ परा भगाना। भाग उजैगढ़४ रहा न थाना॥ कांपा बांदौ५ नरंदुर्रानी६। डर रुहतासँ विजयगिरिमानी॥ कांप उदयगढ़ देवगढ़८ डेरा। तब सो छिपाय आपकहँ घेरा॥ दो० गढ़ गढ़पति जहँतक सबै, कांप डोल जस पात। काकहँ बोल सौंहँ भा, वादशाह करछात॥ चितौर गढ़ औ कंभलनेरी। साजे दोनों जैसि सुमेरी११॥ दूतन कहाँ आय जहँ राजा। चढ़ा तुर्क१२ आवै देरै१३ साजा॥ सुनि राजा दौड़ाई पाँती। हिन्दूनाउँ जहांगलग जाती॥ चितौर हिन्दुनकर अस्थानौं। शत्रू१५ तुर्कहठ कीन्ह पयानौं॥ आदि समुद्र रहे ना बांधा। मैं हों मेड़ भोरै शिर कांधा॥ पुरवहु साथ तुम्हार बड़ाई। नाहित सबकहँ मार चढ़ाई॥ जौलहि मेड़ रहै सुख साखा। टूटहिं वोर जाय नहिं राखा॥ दो० सती जो जियमहँ सतधरै, जरै न छोड़े साथ। जहँ वीड़ा तहँ चून है, पान सुपारी काथ॥ करत जो रहे शाहकी सेवा। तिनकहँ पुनि असभाव परेवां॥ सब होय एकमते जु सिधारे। वादशाह कहँ आन जुहारे॥ है चितोर हिन्दुन की माता। गाँढ़े परै तजजायै न नाता॥ रतनसेन है जूंन्हरै साजा। हिन्दुन मांफ आहि बड़राजा॥ हिन्दुन केर पतंग कर लेखा। दौर परहिं अग्नी जो देखा॥ कृपाँ करहु तौ करहु समीरों। नाहित हमहिं देहु हँस वीरा॥


नाम मुल्क १ से १० तक सामने ११ नाम पहाड़ १२ बादशाह १३ फ़ौज १४ मकान १५ दुश्मन १६ कूच १७ बोझ १८ दरवाज़ा १६ दूत २० एकसलाह २१ मुश्किल २२ छोड़ना २३ मौत का सामान २४ मेहरबानी २५ माफ़ २६॥