पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४२ पद्मावत । पुनिहमजाहिं मरहिं वह ठाँऊँ । मेट न जाय लाजकर नाऊँ ॥ दो० दीन्ह शाह हँस वीरा, और तीन दिन वीचैं । तेहिं शीतलकैको राखे, जिन्हें अगिनमहँ मीचैं ॥ रतनसेन चितोर महँ साजा । आय बजाय बैठ सब राजा ॥ तोमरै बैसं. पनवारँ सर्वांई । औगोहलौर्त आयशिरनाई ॥ क्षंत्री औबचवानै बघेली१३ । अगरवारै चौहानै चंदेली१५ ॥ गहरवारै परहारैं सूकरे१८ । कलैहँस औ ठकुरायजुरे२० ॥ आगे ठाढ़ बजावहिं ढाँढ़ी । पाछे ध्वजा मरण की गाढ़ी ॥ बाजहिं संग शंख औ तूरों । चन्दन खोरी२३ भरे सेंदूरा ॥ सज संग्रामै बांध सब शाखा । छांड़ा जियन मरणसवताका ॥ दो० गगनै धर्ति जो टेकँ , तेहि कागरू पहार । जौलहिजिवकायाँमहँ, परैसो अँगनै भार ॥ गढ़ तस सजा जो चाहै कोई । बरप सातलग खांगैं न होई ॥ बांकीचाँह बांकगढ़ कीन्हा । औसबकोटे' चित्रै समलीन्हा ॥ खण्ड खण्ड चौखण्ड सँवारे । धरे विपम गोलन के मारे ॥ ठांवहिंठांवै लीन्ह सब बांटी । रहा न बीचजोसँचरे ३४ चांटी ॥ बैठे धानुकै कँगुरन कँगूरा । भूमि३६ नआंटीअँगुरिनअँगूरा॥ औ बांधे गढ़ गढ़मत बौरे । फाटै भूमि३८ होहिं जो ठारे ॥ बिच बिच बुर्ज बने चहुँफेरी । बाजै तवैल ढोल औभेरी४० ॥ दो० भागढ़राज सुमेरु जस, स्वँगै छुवैपै चाह । जगह १ तीनदिन की मोहलत २ ठण्डा ३ मौत ४ राजपूतों की ज़ात ५ से.२० तक नामबाजा २१-२२-३६-४० कटोरी २३ लड़ाई २४ आसमान २५ उठाना २६-२८ बदन २७ कमी २६ पँचद्वार खाई ३० क़िला ३१ तसवीर ३२ जगह ३३ चोंटी न जासके ३४ चौकीदार ३५ ज़मीन ३६-३८ हाथी मस्त ३७ नाम पहाड़ ४१ आसमान ४२ ॥