पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४४ पद्मावत । सैंदुर आग शीश उपराहीं । पहियातरखन चमकत जाहीं ॥ कुच गोलादुइ हिरदै लाई । अञ्चलध्वजा रहहिं छिटकाई ॥ रसनों लूक रहहिं मुखखोलें । लङ्का जरै सो उनके बोलें ॥ अलकें जँजीरबहुतगयँ वांधे । खींचहिं हस्ती टूटहिं कांधे ॥ बीर शृंगार दोउ इकट्ठाऊँ । शत्रुशार्ल गढ़भंजन नाऊँ ॥ दो० तिलक पलीता माथे, दशनैं वज्रके बानै । जेहिहेरहिं तेहिमारहिं, चुरकुसकरैनिदानै ॥ जेहिं जेहिंपंथ चलीवेआवहिं । आवहिंजरतआगतसलावहिं॥ जरहिंजोपरबतलागअकासा । बनखंडधकहहिंपलाशैकोपासा॥ गैंड़ा गयँद जरे भे कारे । आवैं मृगी रोजै झनकारे ॥ कोयल नाग काग औ भौंरा । औरजुजरे तिनहिको सँवरा ॥ जरा समुद्र पानि भा खारा । यमुना श्यामभई तेहि झारा ॥ धूमें श्यामअंत्रक्ष भे मेघौ । गगनै श्यामभा धुवां जु भेघा॥ सूरूज जरा चांद औ राहू । धर्ती जरी लङ्क भा दाहू ॥ दो० धर्ती स्वर्ग असूझभा, तबहुँ न आग बुझाय । उठहिं बज्र जर डंगैवे, धूमें रही जगछाय ॥ आवै डोलत स्वर्ग पतारू । कांपे धर्ति न अँगवे भारू ॥ टूटहिं परपत मेरू पहारा । होयहोयधूरउड़हिं होयक्षारौँ ॥ सतखंड धर्ती भइ खंडखण्डा । ऊपर अष्ट भये ब्रह्माण्डौ ॥ इन्द्र आय तेहि खंडहोयछावा । चढ़सबकटकै घोर दौड़ावा ॥
शिर १ छाती २ सीना ३ ज़बान ४ बाल ५ गरदन ६ हाथी ७ जगह ८ दुश्मन को मारनेवाली ६ क़िला तोड़नेवाली १० दांत ११ तीर १२ देखना १३ बहुत १४ ढांख १५ हाथी १६ नाम जानवर १७-१८ धुवां १६-२६ बीच २० बादल २१ आसमान २२-२४-२७-३१ जलना २३ ढेर २५ बोझ न उठाना २८ नाम पहाड़ २६ धूर ३० फ़ौज ३२ ॥