पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 246, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २४५ जेहिंपंथँ चल ऐरावतं हाथी । अबहिंसोडगरगर्गनँमहँआती ॥ औ जहँ जामरही वह धूरी । अबहूँ बसे सो हरिचंद पूरी ॥ गगन में छिपा खेहें तसब्राई । सूरज छिपा रयँनिहोय आई ॥ दो० गयोसिकंदरकजलिवन, भयो सो तस अँधियार । हाथ पसार न सूझे, बरै लाग मसयार ॥ दिनहिं रात अस परीअचाका । भारवि अस्तचन्द्ररथ हांका ॥ मंदिरनैं जगतैं दीपपरगसी । पंथकें चलत बसेरें बसी ॥ दिनके पंख जरत उड़ भागे । निशि केनिसचरेसकलागे ॥ कमल सुकेता कुमुदिनिफूले । चकई बिछुरा चकमन भूले ॥ चला कटक अस चढ़ा अपूरी । अगलहिंपानी पिछलहिंधूरी ॥ महिं उजड़ीसायरैंसवसूखा । वनखँडै रहे न एको रूखा ॥ गंदैं गिरि फूटभयेसव माटी । हस्तिं हेरान तहांको चांटी ॥ दो० खेहँ उड़ानी जाहिघर, हेरत फिरत सो खेह । पियआवाहिंअवंहैंटितोहिं, अंजननयनउरेह ॥ यहिविधिहोतपयाने सोआवा। आय शाह चितौर नियरावा ॥ राजा राउ देख सब चढ़ा । आव कटकें सब लोहे मढ़ा ॥ चहुँदिशिंदृष्टि परी गजजूहाँ । श्यामघंटा मेघा जस रूहा ॥ औरो उँरूकूछ सूझ न आना । स्वर्गलोकघुमरहहिंनिशाना ॥ चढ़ धौराहर देखहिं रँनी । धनतुईअस जाकर सुलतानी ॥ कै धन रतनसेन तुइँ राजा । जाकहँतुकंकटके यहिसाजा ॥ राह १ नाम हाथी २ आसमान ३ खाक ४ रात ५-११ सूर्य ६ मकान ७ दुनियां ८-रोशन ६ मुसाफिर १० कोकाबेली १२ फ़ौज १३-२४-३२ ज़- मीन १४ तालाव १५ जंगल १६ क़िला १७ पहाड़ १८ हाथी १६ चींटी २० धूर २१ निगाह २२-२५ कूच २३ हाथियोंका हलक़ा २६ काली घटा छाई २७ वार पार २८ आसमान २६ महल ३० पद्मावत ३१ ॥