पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४६ पद्मावत। बैरख ढालकेर परछाहीं। रयेनि होत आवै दिनमांहीं ॥ दो० अन्धकूप भा आवै, उड़त आव तसक्षारे । ताल तलावा पोखर, धूर भरी ज्योनार ॥ राजै कहा कीन्ह जस करना । भयोअमूंझसूझ अब मरना ॥ जहाँलग राज साजसबहोऊ । ततखनैं भयो सँजोउसँजोऊँ ॥ बाजे तबल अकोट जुझाऊ । चढ़ा कोप सब राजा राऊ ॥ करहिंतुखारैं पवनसों रीसाँ। कन्थ ऊँच असवार न दीसा ॥ का बरणों अस ऊँच तुखारा। दुई बेर पहुँचे असवारा ॥ बांधे मोरछाँह शिर सारहिं। भीजहिं पूँछ चैंवरजनुदारहिं ॥ रंग सँधार्हो पहुँचे तोपा । लोहे सार पहिर सब कोपा ॥ दो० तैसे चँवर बनाये, औ घाले गलझर्प । बांध सेतें गजगाँहें तहँ, जो देखे सोकम्प ॥ राज तुरङ्गम बरनों काहा । आनी छोर इन्द्र रथवाहा ॥ ऐसो तुरङ्गम परी न दीठी । धनअसवाररहहिं तेहि पीठी॥ जात बालका समुद्र थहाये। श्वेतेँ पूँछ जनु चैंवर बनाये॥ बरण बरणपँखुरी अतिलोनी। जानहुँ चित्रे सँवारे सोनी ॥ माणिकैं जड़े शीशें औ कांधे । चँवर लाग चौरासी बांधे ॥ लागे रतनैं पदारथ हीरा। बरहिंदिनाहिंदीपकचहुँ फेरा ॥ चढ़हिं कुँवर मनकरहिं उछाहूँ। आगे घाल गिनै नहिंकाहू ॥ दो० सेंदुर शीश चढ़ायें, चन्दन खोरें देह । सो तन काह लगाई, अन्त होय जो खेहँ ॥ 'रात १ ख़ाक २ तुरन्त ३ सांमान ४ घोड़ा ५ गुस्सा' ६ मौरछल ७ तेज़-चालाक ८ गलखोद ६ सफ़ेद १० नाम ज़ेवर ११ घोड़ा १२ नज़र १३ सफ़ेद १४ रङ्गरङ्ग निशान १५ बहुत १६ खूबसूरत १७ तसवीर १८ ज- बाहिरात १६-२१ शिर २० खुशी २२ धूर २३ ॥