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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत। ३४७ गर्जे मैमत पुखरी नृपबारौ। देखे जानहुँ मेघ पहारौ ॥ श्वेतगयन्दै पीत औ राँते। हरे श्याम घूमहिं मदमाते ॥ चमकहिं दरपनै लोहें सारी। जनु परवतपर परी अँबारी ॥ श्री मेल पहिराये मूँड़ें। कनकँ नभायँ पाँयतररौंदें ॥ सोने मेल सो दांत सँवारे। गिरिवरँ टरहिंसो उनके टारे ॥ परवत उलटि भूमिसों मारहिं। परै जो भीरतीर अस झारहिं ॥ ऐस गयन्दै सजे सिंहली। कोटि कूर्म्म पीठी कलहली ॥ दो० ऊपर कनक मँजूषों, लाग चँवर औ ढार। भलपति बैठ भालै लै, औ बैठे धन्कोरै ॥ अश्वदलैगं जदेलदोनों साजे। औघनतवल जुझारू बाजे ॥ माथे मुकुट छत्र शिर साजा। चढ़ावजाय इन्द्रअस राजा ॥ आगे रथ सेनाँ सब ठाढ़ी। पाछे ध्वजा मरन की काढ़ी ॥ चढ़े वजाय चढ़ा जस इन्दू। देवलोक गोहनैं भा हिन्दू ॥ जानहुँ चांद नखत लै चढ़ा। सूरजकटकेँ रयनिमर्से मढ़ा ॥ जौलहिं भूंर जाहि दिखरावा। निकस चांद घर बाहर आवा ॥ गगनैनखत जसगिनेनजाहीं। निकस आयत समुइँन समाहीं ॥ दो० देख अनी राजाकी, जग होयगयो असूझ। वहिं कस होय चहतहै, चांद सूर्य्सों जूझ ॥ यहां राज अस साज बनाई। वहां शाहकी भई अवाई ॥ अगलेँ दौड़े आगे आई। पिछले पाछ कोस दश ताईं ॥ हाथी १-१० राजाका दरवाज़ा २ सफ़ेद हाथी ३ लाल ४ चार आईना ५ टीका ६ सोना ७ पहाड़ ८ ज़मीन ६ कछुवा ११ सोने की अंबारी १२ नेज़ा १३ तीरअन्दाज़ १४ घोड़े की फ़ौज १५ फ़ौज १६ साथ १७ तथा सुलतानी फ़ौज १८ रातकी स्याही में १६ सूर्य २० तथा राजा २१ आसमान २२ फ़ौज २३॥

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