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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 249

२४८ पद्मावत। शाह आय चितोरगढ़ बाजां । हस्ती सहसबीस सँगगाजा ॥ उनई आय दोउ दल गाजे । हिन्दू तुरुक दोउसमें बाजे ॥ दोउसमुंद्रदधि उदधि अपारा । दोनों मेरु खंखड पहारा ॥ कोप जो झार दुहूँदिश मेली । औ हस्ती हस्तहिं सो पेली ॥ आंकुश चमक बीज असवाजहिं। गरर्जाहंहस्तिमेघजनुगाजहिं ॥ दो० धर्ती स्वर्ग दोऊ दल, जूझहिं ऊपर जूझ । कोई टरै न टारै, दोनों वज्र समूह ॥ खण्डपैंतीसवां सुलह राजा और वादशाह ॥ हस्तिंहि साँहस्ती हठगाजहिं । जनु परवत परवतसोंबाजांहं ॥ कोउ गयंद न टारें टरहीं । टूटहिं दांत मूँड़ गिरंपरहीं ॥ परबतआय जो परहिं तराहीं । दलं महँ चांपखेहँ मिलजाहीं ॥ कोइ हस्ती असवारहिं लेहीं । सूँड़ समेट पांय तर देहीं ॥ कोइ असवारसिंह दै मारहिं । हन मस्तक सों सूँड़ उतारहिं ॥ गैब गयंदैं तनगगनें पसीजा । रुधिरे चले धर्ती सबभीजा ॥ कोइ मैमत सँभारहिं नाहीं । तबजाने जब गुदशिरेंखाहीं ॥ दो० गगन रुधिर जसवरसे, धर्तीभीज मिलाय । शिरधरटूटंबिलाहिंतस, पानी वेगेँ विलाय ॥ उठो बज्रजूझे जस सुना । तेहिंते अधिकै भयो चौगुना ॥ बाजहिं खङ्ग उठी डर आगी । भुइँजर चही स्वर्ग कहँ लागी ॥ चमकहिं बीज होय उजियारा । जेहि शिरपरै होय दुइ फारा ॥ सेनमेघ अस दुहुँदिशि गाजा । खङ्गजोबीजबीजें असवाजा ॥ पहुंचा १ हाथी २-६-७-८ बराबर ३ समुद्र दही का ४ पहाड़ ५ फ़ौज ६ धूर १० शेर ११ गरूर १२ हाथी १३ आसमान १४-२१ खून १५ भेजा शिरका १६ जल्द १७ भारी लड़ाई १८ बहुत १९ तलवार २० वादल सी फ़ौज २२ बिजुली २३ ॥