पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५० पद्मावत । खड्गैं बीज सब तुर्क उठाई । ओड़नें चन्दकमल करैं पाई ॥ दो० जग मग अनी देखके, धाय दृष्टि तेहि लाग । छुवे होय जो लोहे, माझँ आव तेहि आग॥ सूरजेँ देख चांद मन लाजा । विकसतैंकमलकुमुदँ भाराजा॥ पहिलहिचन्दआवनिशिपँाई। दिनदिनेरै सो कौन बड़ाई ॥ अह्रै जो नखतचांदसँग तपी। सूरे की दृष्टिगगनैमँहँ छिपी ॥ की चिंता राजा मन बूझा । जेहिसो स्वर्ग न धर्तीजूझा ॥ गढ़पति उत्तरलड़े नहिं धाई। हाथपरें गढ़ हाथ पराई ॥ गढ़पतिइन्द्रगगनगढ़ काजा । दिवसे न निसरइँनिकरराजा॥ चन्द्रसयनिरहिनखतहिंमांझा । सूर्य्यनसौंहि होयचहिसांझा॥ दो० देखा चन्द्र भोर भा, सूरज के बड़ भाग । चांदफिराभागढ़पति, सूर्य्यगगनगढ़लाग ॥ कटकैं असूझअलवलशाही । आवत कोइ न सँभारै ताही ॥ उदह समुद्र जस लहरे देखी । नयनदेख मुखजाय नलेखी ॥ केते बजावत उतरे घाटी । केते बजावत मिलगये माटी ॥ केतेहिं नितहिं देइनवसाजा। कबहुँ न साज घटै तस राजा ॥ लाखजाहिँआवहिंनवलाखा । फरै भरै उपैनी नइशाखा ॥ जो आवै गढ़ लागै सोई । थिर है रहै न पावै कोई ॥ उमर अमीर रहे जहँ ताई । सबही वांट अलंगै पाई ॥ दो० लाग कटकैं चारहुँ दिशि, गढ़सोपराइकदाहुँ । सूर्य्यगहन भा चांदहिं, चांदभयोजसराहु ॥ सूर्य्य १-११-१२ ढाल २-हाथ ३ फ़ौज ४-१६-२५ निगाह ५ बीच ६ तथा बादशाह ७ खिलना ८ कोकविली ६ रात १०-१७ नज़र १३ आस- मान १४-१५ दिन १६ सामने १८ दरिया आगका २० हमेशा २१ पैदा होना २२ क़िला तथा दुनिया २३-हद २४-आग २६ तथा राजा २७ ॥