भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 252, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 252

पद्मावत । २५१ अथवादिवसैं सूरै भा बासा। परीरयैनि शंशिउवा अकासा॥ चांद छत्रै दय बैठो आय। चहुँदिश नखत दीन्ह छिटकाय॥ नखत अकाशा हिं चढ़े दिपाई। ततत लूका परहिं बुझाई॥ परहिं सेल जसपरहिं विजाँगी। पहर्नहिं पहन वाज उठआगी॥ गोला पर गोला ढरकावहिं। खून करत चारहुँ दिशि आवहिं॥ उनई घटा वर्ष भर लाई। ओला टपकैं परे बुझाई॥ तुरकन मुख फेरैं गढ़ लागी। एक मरे दूसर होय आगी॥ दो० नृपति बार्न सनमुख परहिं, सकै न कोई गाँढ़। उनई शाह सेनें सब, रही भोर लग ठाढ़॥ भयो विहान भानुं पुनि चढ़ा। सहसैं किरन जैसो विधि १४ गढ़ा॥ भा धावा गढ़ लीन्ह गरेरी। कोपा कटकै लाग चहुँफेरी॥ बान करोर एक मुख छूटहिं। बाजैहिं जहाँ फोकल हि फूटहिं॥ नखत गगने जस देखे घने। तस गढ़ फाटहिं बानहिं हने॥ बानवेध साही किये राखा। गढ़ भा गरुड़ फुलावै पांखा॥ उड़गाकीरै कठिने हियवाला। तोपै लहैं होय मुखराताँ॥ पीठ दीन्ह तेहिं बानहिं लागे। चांपत जाहिं पगहिं पग आगे॥ दो० चार पहर दिन जूझ भा, गढ़ न टूट तस बांक। गरू होत पै आवै, दिन दिन नाकहिं नाक॥ छैका कोट जोर अस कीन्हा। घुसा नगर सुरंग तहँ दीन्हा॥ गरगंजे बांध कमाँनै धरीं। बज्र अगिन मुख दारू भरीं॥ हवशी रूमी और फिरङ्गी। बड़ बड़ गुनी और तेहिसङ्गी॥ ... दिन १ सूर्य २ रात ३ चांद ४ तथा रतनसेन ५ गोला ६ आग ७ पत्थर ८ राजा के तीर ६ सामने १० फ़ौज ११-१५ सूर्य १२ हज़ार १३ ईश्वर १४ पहुँचना १५ आसमान १७ राजा के हवास को तोता उड़ गया १८ मुश्किल १६ मुँह लाल २० घेरा क़िला २१ मरहला २२ तोपें २३॥

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य) · पृष्ठ 252, कुल 318 में से · BharatKosha