पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५८ पद्मावत । हंस कनकें¹ पींजर हत आना । औ अमृतनग² परसपषानाँ³ ॥ और सुनों⁴ सोने की डांडी । शार्दूलैं रूपेकी कांडी ॥ दीन्ह बसीठ सुरजा लै आई । बादशाह पहँ आन मिलाई ॥ ऐ जग सूर⁵ भूँमि उजियारी । विनतीकरहिकागर्मसिकारी⁶ ॥ बड़ परताप तोर जग तपा । नवों खण्ड तुहिंके न छिपा ॥ कोहंबोह दोनों तोहि पाहां । मारोसि धूप जियावसिछाहां ॥ जनमनसूर⁹ चांदे¹⁰ सो रूसों¹¹ । गहनैं¹² गिरासा पड़ा मँजूसों¹³ ॥ दो० भोर होय जो लागै, उठै रोरे¹५ किये काग । मसि¹६ छूटैसबश्यैनि की, कागोंजायँअभाग ॥ कर बिनती आज्ञाँ असपाई । कागहिंसे आपहिंमसिलैआई ॥ पहिले धनुष नवै जबै लागी । काग न लेइदेख सुरभागी ॥ अबहूँ तेहिसुर साँहैं²¹ न होहीं । देखहिंधनुपचलहिंफिरओहीं ॥ तेहि कागहिंकी कौन बसीठी । जो मुख फेर चलहिंदैपीठी ॥ जो सरसाँहैं होहिं संग्रामी । कितबकँ होतश्वेत²⁶ वैश्यामा ॥ करहिं न आपन ऊजर केशाँ²⁸ । फिरफिर कहहिं परारसँदेशा ॥ काग नाग पै दोनों बांकी । अपैंनीचलतश्यामभयआंकी ॥ दो० मेटजाय नहिं मसि कबहुँ, भये श्याम वे अङ्ग । सहसैं बार जो धोवहू, तहू न मेट कलङ्क³³ ॥ सोना १ पारसपत्थर २ हाविन्ददस्ता ३ लाल शेर ४ पिंजरा ५-१४ सूर्य ६ ज़मीन ७ काला कौआ तथा राजा ८ गुस्सा-मेहरवानी ६ सूर्य तथा बादशाह १० तथा राजा ११ गुस्सा १२ पकड़ाहुआ १३ हाज़िर १५ सियाही १६-२०-३१ रात १७ कौआ की सियाही दूर होजायगी १८ हुक्म १६ निशानेपर २१ देवता २२ मुक़ाबिल २३ वकालत २४ सामने २५ लड़ाई २६ बगुला २७ सफ़ेद २८ बाल २६ आपही काले होते ३० हज़ार ३२ ऐब ३३ ॥