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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत। २५६ अब सेवाँ जो आय जोहारी । अबहूँ देख श्वेते कहिकारी ॥ कहो जाय जो सांचन डरना । जहवांशरणनाहिंतहँ मरना ॥ काल्ह आव गढ़ ऊपर भानू । जो दै धनुषै साँह हिय बानू ॥ पान बसीठे मया कर पाई । लीन्ह पान राजा पहँ आई ॥ जस हम भेंट कीन्ह गा कोहूं । सेवा मांझ प्रीति अरु छोहू ॥ काल्ह शाह गढ़ देखे आवा । सेवा करहु जैसो मनभावा ॥ गुनें सोच लैसो वोहितें बोझा । जहँवां धनुषबान तहँ सूझा ॥ दो० भा आयसु अस राजघर, बेगींकरो रसोय । तस सँभार रस मिलवहु, जेहि सुप्रीतिरसहोय॥ खण्ड पैंतीसवां ज्याफत बादशाह ॥ लागे मेढ़ा बड़ औ छोटी । घरघर आनी जहँजहँ मोटी ॥ हिरनरोझे लगनीं बनवसी । चंत्र कोन लाखे औसेंसी ॥ तीतर बटई लवा न वाची । सारसगुंजें पुछारे जोनाची ॥ धरी परेवाँ पांडुकें हेरी । केंहा कँदरो उतरें बगेरी ॥ हारल चरजें आय दन्दपरे । बन कंकरी जलकंकरी धरे ॥ चकई चकवा केंपें बिदारे । नकटों लेदी सोन सलौरे ॥ मोट बड़े सब टोइ टोइ धरे । ऊनर दूबर खडगें न चढ़े ॥ दो० कंठपरी जब झूरी, रक्त छुरा होय आस । कित आपन तनपोषी, भखा परावा मांस ॥ धरे मच्छ पढ़ना औ रोहू । धीमर धरतकरै नहिं छोहूं ॥ खिदमत १-६ सफ़ेद २ पनाह ३ सूर्य ४ कमान तीरधरदे ५ क़ासिद ६ गुस्सा ७ मेहरबानी ८ रस्सी १० नांच ११ हुक्म १२ जल्द १३ चकरा १४ पाढ़ा १५ नांम जानवर १६ से ३४ तक । तलवार ३५ पालना ३६ दया ३७ ॥