पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविधि¹मिलावजासोमनलाग। जोरहिं तोर प्रेम कर तागा ॥ दो० हाथ धोय जब बैठो, लीन्ह ऊब के श्वास । सँवरा सोई गुसांई, देय निराशहिं आस ॥ भइज्योनार फिरा खँडवॉनी । फिराअ्ररगजाँ कंकहि वानी ॥ नग अमोल सो थारहिं भरे । राजैं सेर्व आन के धरे ॥ बिन्ती कीन्ह घालगयैं पागा । येजगसूर सीवें गुहिलागा ॥ औगुन अश कांप यहिजीऊ । जहां भानु तहँ रहा न सीऊँ ॥ चारहुँ खण्ड भानु अस तपा।जेहिकी दृष्टि¹⁴ रैयनिमसि¹⁵ छिपा॥ औभानुँहिंअस निरमलैकला। दरश जो पावै सो निरमला ॥ कमल भानु देखै पै हँसा । औ भांतेहिं चाहै परकसा ॥ दो० रतैनैश्यामतहँरैंयनिमसिं¹⁷, येरवि²⁰ तिमिरं²¹ सँहार । कर सो दृष्टि²⁴ औ कृपा, दिवसैं देह उजियार ॥ सुनबिन्ती²⁶ बेहसाँसुलतानू । सहसैंहि किरणदिपै जसभानूँ ॥ ऐ राजा तुइँ सांच जुड़ावा । भइसो दृष्टिअवसीवैं जुड़ावा ॥ भानु की सेवा जो कर जीव । तेहिमसिकहां कहांतेहिसीवैं ॥ खाउ देश आपन कर सेवा । और देउँ मांडो तोहिं देवा ॥ लीकपषानैं पुरुषैं कर बोला । ध्रुवै सुमेरुँ ऊपर नांहिं डोला ॥ फेर बसावैं दीन्ह नग सूरू । लाभदेखायलीन्हचहिमूरू ॥ हँस हँस बोले टेके कांधा । प्रीतिभुलाय चहै छल बांधा ॥ दो० माया बोल बहुत कर, शाह पान हँस दीन्ह । ईश्वर १-२ नाउम्मेद ३ शरवंत ४ अतर ५ नज़र ६ अर्ज़ ७ गर्दन ८ सूर्य ९-११-१३-१७-२२-२६-३१ जाड़ा १०-१२-३०-३२ निगाह १४ रात १५-२० सियाही १६-२१ पाकसाफ़ १८ राजा १६ अंधियारा नाश- कर२३ अच्छी नज़र २४ दिन २५ अर्ज़ २६ हँसा २७ हज़ार २८ पत्थर ३३ मर्द ३४ नाम नखत ३५ पहाड़ ३६ लालच ३७ जड़ ३८ ॥