पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 272, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २७१ पहिले रतनैं हाथ कै, चहौं पदारथ लीन्ह ॥ माया मोह विबश भा राजा । शाह खेल शतरंज करसाजा ॥ राजाहै जबलग शिर घामू । हमतुमघड़िकै करहिंबिश्रामू ॥ दर्पन शाह भीतै तहँ लावा । देखों जोह झरोखें आवा ॥ खेलहिं दोऊ शाह औ राजा । शाहक रुख दर्पनरहि साजा ॥ प्रेमक लुब्ध पियादे पाउँ । चलै सौंहिं ताके कहँठाउँ ॥ घोड़ा दै फरजी बँद लावा । जेहिं मुहरा रुखचहै सोपावा ॥ राजा पील देइ शह मांगा । शहँ दै चाहि मैरथ स्वांगा ॥ दो० पीलहि पील देखावा, भयो दुहूँ चौदांत । राजा चहै बुर्द भा, शाह चहै शहमात ॥ सूरै देख वै तेरैं दासी । जहँ शशि तहां जाय परकौसी ॥ सुना जो हम देहली सुलतान् । देखों आज तपै जस भानू ॥ ऊंच छत्र ताकर जगमाहां । जग जोहांह सब वहकीछाहां ॥ बैठि सिंहासन गर्वहि गूंजा । एक छत्र चारहुँ खंड धूंजा ॥ निरखि न जायसौंहि वहपाहीं। सबैनवै कै दृष्टि तराहीं ॥ मन माथे वह रूप न दूजा । सबरूपवन्त करहिं वह पूजा ॥ हमअस कसा कसौटी आरसें । तुहूँ देख कस कंचनें पारस ॥ दो० वादशाह देहली कर, कित चितौर महँ आव । देख लेहु पद्मावत, जें न रहैं पछताव ॥ विकसै जो कुमुदै कह शशि ठाऊं। विकसा कमल सुनत रबि नाऊं तथा राजा १ तथा पद्मावत २ एक घड़ी ३ आराम ४ दीवार ५ भरा- हुआ ६ सामने ७-१८ जगह ८ शाह देके बाज़ी जीतना चाहा ६ मुक़ाबिल १० सूर्य ११-१५-२५ नखत १२ चांद तथा पद्मावत १३-२४ रो- शनी १४ गरूर १६ देखना १७ निगाह १६ आईना २० सोना २१ खिलना २२ कोकाबेली २३ ॥