पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७२ पद्मावत। भइनिशि¹ शशिधौराहर² चढ़ी। सोरहकिरनजैसिविधि³ गढ़ी॥ बेहँस झरोखें आय सँरेखी। निरखै शाह दर्पनमहँ देखी॥ होतहि दरश परसँ भा लूना। धरती स्वर्ग भयो सब सूना॥ रुख मांगत रुखँ तासों भयो। भा शहमात खेल मिटगयो॥ राजा भेद न जानै झाँपी। भाबिएनारि पवनविनकाँपा॥ राघव कहा किलाग सपोंरी। लै पौढ़ावहिं सेज सँवारी॥ दो० रैनि बीतगइ भोरभा, उठा सूरे तब जाग। जो देखै शँशि नाहीं, रही कराँ चितलाग॥ भोजन प्रेम सो जानिजोजेवां। सँवरहिंरुचिवासरस केवों॥ दरश देखायजायशँशि छिपी। उठा भानुँ जस योगी तपी॥ राघव चेत शाह पहँ गयो। सूर्य देख कमल विप भयो॥ छत्रपती मन कहां सो पहुँचा। छत्र तुम्हार जगत पर ऊँचा॥ पोटै तुम्हार देवतन पीठी। स्वँगपतालरयनिदिनदीठी²⁰॥ छोहते²¹ पलैं हहिं उघटे रूखा। कोहते²² महिसायँरसंबसूखा॥ सकलैं जगत तुम नावै माथा। सबकर जियन तुम्हारेहाथा॥ दो० दिनननयनलावहुतुम, रयनि भावनहिं जाग। अबनिचिन्तअससोयं, कहँ विलम्ब असलाग॥ देख एक कौतुकँ हौं रहा। रहअन्तरपैटें पैनहिं अहा॥ सरवैरै एक देख मन सोई। रहापानि अब पानि न होई॥ स्वँग आय धरती महँ छावा। रहा धरति पै धरत न आवा॥ रात १-११ महल २ ईश्वर ३ होशियार ४ देखना ५ पारसपत्थर ६ मुँह ७ छिपा ८ नाम भाट ६ चुर्रीहवा १० सूर्य तथा बादशाह १२-१७ चांद तथा पद्मावत १३-१६ ध्यान १४ कमल १५ तख्त १८ आसमान १६- २६ निगाह २० मेहरवानी २१ हराहोना २२ गुस्सा २३ तालाब २४-२८ सब २५ तमाशा २६ परदा २७॥