पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७४ पद्मावत । भौंहधनुषशशि दुइज ललाटू । सब शनिन ऊपर वह पाटू ॥ सोई मिरगं देखाय जो गयो । वेनी नाग दिया चितभयो ॥ दरपण महँ देखी परछाईं । सोमूरति भीतर जिव नाहीं ॥ दो० सबै श्रृंगार बनी धनि, अब सोलीमाँत कीज । अलकँजोलटकीअधरंपर, सोगहि केसरलीज ॥ खण्ड उन्तालीसवां क़ैद होना राजा रतनसेन का ॥ मीते भा मांगा वेग बेवानू । चला सूरै सँवरा अस्थानू ॥ चलंत पंथै राखा जो पाऊं । कहांरहेथिरें चलत बैठाऊं ॥ पथिकै कहँ कहवां ससताई । पंथै चलै तब पंथ सेराई ॥ छल कीजे दल जहां न आंटों । लीजे फूल टारके कांटा ॥ बहुत मया सुन राजा फूला । चला साथ पहुँचावे भूला ॥ शाह हेत राजा सों बांधा । वात हिलाय लीन्ह गहि कांधा ॥ घिव मँधु सान दीन्ह रससोई । जो मुँह मीठ पेट विष होई ॥ दो० अमिय बचन औ माया, को न मुयो रस भीज । शत्रु मरै अमृत जो, तेहि विष काहे दीज ॥ चांद घरहि जो सूरज आवा । होयसो अलोपं अमावसपावा ॥ पूछहिंन खंतेँ मलीनसोमोती । सोरहकला न एकोज्योती ॥ चांद गहन आगाहिं जनावा । राज भूलगहिशाहचलावा ॥ पहिले पँवरै नांघ सो आई । ठाढ़े भये राज पहिराई ॥ चांद १ माथा २ तख्त ३ हिरन ४ चोटी ५ पद्मावत ६-२७ अक़िल ७ ज़ुल्फ़ ८ होंठ ६ पकड़ना १० दोस्त ११ सवारी १२ बादशाह १३ मकान १४ राह १५-१६ क़ायम १६ मुसाफ़िर १७-१८ पहुँचना २० पकड़ना २१ श- हद २२ मीठीवात २३ दुश्मन २४ छिपजाना २५ तथा सखी २६ ख़बर २८ दरवाज़ा २६ ॥