पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७६ पद्मावत । आज परे पाण्डवेँ बँद माहां। आज दुशासनँ उतरी वाहां॥ दो० आज धरा बलराजा, मेला बांध पतार। आज सूरे दिनअथवा, भाचितौरअँधियार॥ देव सुलेमाँ के बँद परा। जहँलग देव सबहिंसतह्रा॥ शाहलीन्ह गहिकीन्ह पयानाँ। जोजहँशत्रुसोतहांबिलाना॥ खुरासानँ औ डरा हरेवै। कांपा बिदुर्र धरा यस देव॥ बंध उदयगिरि १० धौलौगिरी। कांपी सृष्टि दुहाई फिरी॥ उवा सूर भइ सामहि करा। पालाफूट पानि होय ढरा॥ डँडवी दांड दीन्ह जहँ ताई। आय दण्डवत कीन्ह सवाई॥ द्वंददांडे सब स्वर्गहि गई। भूमि जो डोली इस्स्थिर्र भई॥ दो० वादशाह देहली महँ, आय बैठ सुख पोंटँ। जेहिंजेहिंशीशँउठावा, धरती धरी ललाटँ॥ हबँशी बन्दवान जिवबधौ। तेहि सौंपा राजा अगदहौँ॥ पीनि पवन कहँ आश करेई। सो जियवधिकैंसांसवहुदेई॥ मांगत पान आग लै धावा। मुँगरी एक आन शिरलाव॥ पानी पवन तुइँ पियासोपिया। अबको आन देय पनिया॥ तब चितौर जिय रहा न तोरे। वादशाह हैं शिर पर मोरे॥ जोहि हँकारेही२४ उठ चलना। सोकितकरोहय कैंरमलना॥ करै सो मीत गाढ़ बँद जहां। पान फूल पहुँचावै तहां॥ दो० जलँ अंजलमहँ सोवा, समुद्र न सँवराजाग। राजा युधिष्ठिर १ नाम बहादुर २ सूर्य ३ नामबादशाह ४ कूच ५ दुश्मन ६ नाममुल्क ७ से ११ तक। दुनिया १२ आवाज़मुनादी १३ आस- मान १४ ज़मीन १५ क़ायम १६ तख़्त १७ शिर १८ माथा १९ हबशी दरोगा क़ैदखाना २० जल्लाद २१ जलाहुवा २२ जानमारनेवाले २३ बो- लाना २४ हाथ २५ पानीमहँ पियासा २६ ॥