पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २७७ अबधरकाढ़ामच्छज्यों, पानी मांगत आग॥ पुनिचल दुइजने पूछन धाये। वै शठ दग्धै आय देखराये॥ तुइँ मेरिपुरी न कबहुं देखी। हाड़ जो बिथरे देखन लेखी॥ जानी नहिं कि होब अस मुहूँ। खोजे खोज न पावब कहूं॥ अब हम उतरें देहुरे देवा। कौने गर्व न मानी सेवा॥ तुइँ अस बहुत गाड़खन मूंदी। बहुर न निकसबारेहोयखूंदी॥ जो जस हँसै सो तैसे रोवा। खेलै हँसै अभी भुइँ सोवा॥ जस अपने मुहँ काढ़ धुवां। चाहेसि परा नरक के कुवां॥ दो० जरेसि मरेसि अब बांधा, तैसो लाग तोहिदोष। अबहुं मांग पद्मिनी, जो चाहेसिभा मोर्ष॥ पूँछहिं बहुत न बोला राजा। लीन्हेसि जियेमीर्च मनसाजा॥ खनं गड़वा चरनहिं लै राखा। नितउठ दग्धैं होयनौलाखा॥ ठाँवै सो सांकर औ अँधियारा। दूसर करवट लेइ न पारा॥ पीछे सांप आय तहँ मेली। बांका आन छुवावहिं हेली॥ धरहिं सँदौसी छूटै नारी। रात दिवसै दुखपहुँचै भारी॥ जो दुखकठिन न सहै पहारू। सोअँगवाँ मानुषशिरभारू॥ जो शिर परै आय सो सहै। कछु न बिसाय काहसों कहै॥ दो० दुख जारै दुख भूजै, दुख खोवै सब लाज। काजैहि चाह अधिकदुख, दुखीजानजेहिबाज॥ पद्मावत बिन कंत दुहेली। बिनजलकमलसूखजसंबेली॥ गाढ़ी प्रीति सो मोसों लाई। देहिलीजायनिचितहोयछाई॥ आदमी १ आग २ यमपुरी ३ जंघाच ४ गहूर ५ फेर ६ पाप ७ छूटना क़ैदसे ८ मौत ६ तंगपिंजरा में क़ैद किया १० जलाना ११ जगह १२ डांग १३ संसी १४ दिन १५ भारी १६ उठाना १७ दुखकों चह जाने जिस पर पड़े १८ दुखी १६॥