पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 279, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें२७८ पद्मावत । कोउ न बहुरा पुनि हर देशू । केहि पूछहुँ को कहै सँदेशू ॥ जो कोइ जाय तहां कर होई । जो आवे कुछ जान न सोई ॥ अगम पंथे पिय तहां सिधावा । जोरे गयो सो बहुर न आवां ॥ कुवांदार जल जैसो बिलोवा । डोल भरा नयनहिं वन रोवा ॥ लेजुरि भई नांहिं बिन तोहीं । कुवां परीधर काढेसिमोही ॥ दो० नयन डोल भर ढारै, हिये न आग बुझाय । घड़ी घड़ी जियावै, घड़ी घड़ी जिव जाय ॥ नीर गँभीरं कहां हो पिया । तुम बिन फाटै सरवर हियाँ ॥ गयो हेराय बिरह के हाथा । चलत सरोवर लीन्हेन साथा ॥ चरत जो पंखे केलि कर नीरा । नोर कठिन कोउ आवन तीरा ॥ कमल सूख पखुरी बेहिरानी । गलगल कै मिल लौर हेरानी ॥ बिरह रेत कंचन तन लावा । चून चून कै खेह मिलावा ॥ कनकैकै जो कनकनै है बेहिरोई । पिय पै छार समेटो आई ॥ बिरह पवन यहि छार शरीरू । छारहि आन मिलावहु नीरू ॥ दो० अबहुँ जियाविहु के मया, बिथुरी छार समेट । नइकायौ अवतरै नव, दर्श तुम्हारे भेट ॥ नयन सीप मोती तस आशू । तंतैं ततपरहिं करत न नाशू ॥ पदक पदारथ पद्मिन नारी । पिय बिन भइ कौड़ी बेरेबारी ॥ सँग ले गयो रतन सब ज्योती । कंचन क्या कांच भइ पोती ॥ बूड़त हों दुख दग्धे गँभीरी । तुम बिन कंत लाव को तीरी ॥ मुश्किल राह १ लौट २ पद्मावत ३ रस्सी ४ खाविन्द ५ छाती ६-६ पानी गहिरा ७ तालाब ८-१० जानवर परिन्द ११ अलग १२-१६ धूर १३- १६-२० मिलना १४-१५ सोना १७-२७ रेज़ारेज़ा १८ पानी २१ बदन २२ पैदा होना २३ गर्म २४ लाल जवाहर २५ मोल २६ आगमारी २८ किनारा २६ ॥