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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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हिये³ विरह होय चढ़ापहारू। जल यौवन सहसकैन भारू॥ जलमहँ आगिनसोजानि विछूता। पांहन जरहिं होहिं सब चूना ॥ कौने यतन कंत तुम पाऊँ। आज आगहौं जरत बुझाऊँ॥ दो० कौन खण्ड हौं हेरों³, कहां वन्धु हौं नांहिं। हेरे कतहूँ न पाऊँ, बसै तु हिरदय मांह ॥ नागमती पियपिय रत लागी। निशिदिन तपै मच्छ ज्यों आगी भँवर भुजंग कहां हो पिया। हम ठेगाँ तुम कानन किया॥ भूल न जाहि कमल के पाहां। बांधत बिलंब न लागैनौहां ॥ कहां सो सूर पास हौं जाऊँ। वींधा भँवर छोर के लाऊँ ॥ कहां जाऊँ को कहै संदेशा। जाऊँ सो तहँ योगिन के भेशा॥ फार पटोरे सो पहिरौं कंथों। जो मोहिं कोउ देखावै पंथों॥ वह पंथे पलकन जाऊँ बुहारी। शीश चरण के चलौं सिधारी ॥ दो० को गुरु अगवा होय सखि, मोहि लावै पंथ मांह । तन मन धन बल बल करों, जो रे मिलावै नांहैं॥ कै कै कारण रोवै बाला। जनु टूटहिं मोतिन के माला ॥ रोवत भई न श्वास सँभारा। नयन चुवहिं जनु उरती धारा ॥ जाकर रतन परे पर हाथा। सो अनाथ किमि जीवै नाथा॥ पांचौं रतन वह रतनहि लागी। बेगैं आव पिय रतन सभागी ॥ रही न ज्योति नयन भये खीनी। श्रवण न सुनैं बैनैं तुम लीनी॥ रसनौं रस नहिं एको भावा। नासिकैं और वास नहिं आवा॥ तचत चतुम बिन अंगैं मोहि लागी। पांचौं²⁴ दग्धै विरह अब जागी॥ छाती १ पत्थर २ देखना ३ कैद ४ खाविन्द ५-८-१५ रात ६ दुश्मनी ७ सूर्य ६ सारी १० गुदड़ी ११ राह १२-१३ शिर १४ ताक़त देखने, सुनने, सूंघने, बोलने, छूने की १६-२४ जल्द १७ रोशनी कम १८ कान १६ आवाज़ २० ज़बान २१ नाक २२ वदन २३ आग २५ ॥