भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 281, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 281

२८० . पद्मावत । दो० बिरह सो जार भस्मकै, चहै उड़ावा खेहं । आय सो धन पियमिलवे, करलेवे नई नेह ॥ पियबिन व्याकुल व्यापी नागाँ । बिरहा तपनश्याम भये कागा ॥ पवन पानि कहँ शीतल पीउ । जेहि देखे पलुहै तनजीउ ॥ कहँ सो बास मलयौगिरि नाहाँ । जेहि कल परत देत गलवाहा ॥ पद्मिनि ठगनी भइ कित साधा । जेहिते रतन परा पर हाथा ॥ होय बसंत आवहु पियकेसर । देखै फिर फूलै नागेसरं ॥ तुमबिन नाँह रहे हियँ तचा । अब नहिं बिरह गडुरपै बचा ॥ अब अँधियार परामंसि लागी । तुमबिन कौन बुझावै आगि ॥ दो० नयनश्रवणं रसरसनौ, सबै खीनं भये नाँहँ । कौन सो दिन जेहि भेंटके, आय करै सुखछाँह ॥ कुंभलनीरेँ राय देवपालू । राजा केर शत्रुँ हियेंशालू ॥ उनपै सुनी कि राजा बांधा । पाछल बैरसँवर छल सांधा ॥ शत्रु शालैँ तब न्योरे सोय । जो घर आव शत्रुँकी जोय ॥ दूती एक बृद्ध तेहि ठाँऊँ । ब्राह्मण जाति कुमोदन नाऊँ ॥ वह हँकौरं के बीरा दीन्हा । तोरे बल मैं बलजिव कीन्हा ॥ तुइँ कुमदनी कमल के नेरे । स्वर्ग जो चाँद बसै तोहि हेरे ॥ चितोर महँ जो पद्मिन रानी । करवलछल सो दै मुहिं आनी ॥ दो० रूप जगत मनमोहन, जेहि पद्मावत नाऊँ । कोटि द्रव्य तुहिं देहों, आन करेसि इकठाउँ ॥ कुमदिन कहा देखहों सोहों । मानुष कहा देवता मोहों ॥ . धूर १ रानी नागमती २-६ हरा होना ३ चन्दन ४ खाविन्द ५-७-१३ दिल ८ सियाही ६ कान १० ज़बान ११ कमज़ोर १२ नाममुल्क १४ दुश्मन १५-१८ दिल दुख देनेवाला १६ दुश्मन दुख देनेवालेने चाहा किं जैसे बनपड़े १७ जगह १८ बुलाया २० आसमान २१ नज़र २२ ॥